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खाली गांव कर रहे हैं अपनों का इंतजार | पलायन से बेहाल-द्वारीखाल | जयमल चंद्रा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा, द्वारीखाल


पहाड़ पलायन की मार झेल रहे हैं। पहाड़ का शायद ही कोई ऐसा गांव हो जो पलायन से अछूता रहा हो।
मूलभूत सुविधाओं का टोटा और आधुनिकता की चकाचैंध से पहाड़ से पलायन का ग्राफ तेज किया है। जनपद पौड़ी का द्वारीखाल ब्लाक भी पलायन की मार झेल रहा है। गांव के गांव खाली होने लगे हैं। खास बात यह है कि कोविड संक्रमण के चलते लोग वापस गांव लौटे थे और गांवोें में खासी रौनक थी लेकिन कोविड कमजोर पड़ते ही फिर गांव बीरांन व हैरान हो गये हैं।

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पौड़ी गढ़वाल का द्वारीखाल ब्लॉक में लगभग 100 ग्राम पंचायतें हैं। आज ये सारे गांव पलायन की मार झेल रहे है। वह दिन दूर नही जब धीरे-धीरे सारे गांव पूर्णरूप से पलायन के शिकार हो जाएंगे। पिछले तीन चार दशकों में पहाड़ो से पलायन का सिलसिला लगातार जारी है। कहा यह भी जाता है कि जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रो में से एक द्वारीखाल ब्लॉक भी हैं। लगतार पलायन आज भी जारी है। गांवो का हर तीसरे-चैथे मकान पर ताला लगा है, या खंडर में तब्दील हो रहा है। जहाँ दूर-दूर तक सीढ़ीनुमा खेत विविन्न प्रकार की फसलों से लहलाती थी वहीं आज चारों ओर बंजर ही बंजर खेत नजर आते हैं। झाड़िया ने खेतों व रास्तांे को ढक लिया है।

रोजगार की कमी, उच्च व गुणवत्ता वाली शिक्षा की कमी जिस कारण यहाँ से पलायन का सिलसिला लगातार चल रहा है। यदपि कोविड काल मे प्रवासियों ने गांव की ओर रुख किया भी लेकिन रोजगार की मुसीबतें झेलने पर पुनः शहरों की ओर रुखसत करना शुरू कर दिया है।
अगर शासन ,प्रसाशन व जनप्रतिनिधियों द्वारा इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ये खूबसूरत पहाड़ी गांव एक दिन पूर्ण रूप से खाली हो जाएंगे, जहाँ झाड़ियो व जंगलों के सिवाय कुछ नही बचेगा।

क्या कहते हैं ग्रामीण
यहां के ग्रामीणों से बातचीत से पता चला कि 20-30 सालांे में इन गांव की जनसंख्या आधी हो गयी है।बूढ़े दंपति पलायन कर गए अपने बच्चों की राह आज भी देखते हुए नजर आ जाएंगे।

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स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा
पलायन का एक कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्या भी है। यदपि धीरे धीरे दूर दराज गांव में सड़के पुहुँच रही है मगर यही सड़के 25-30 साल पहले आ जाती तो शायद पलायन की कहानी इतनी गंभीर नही होती।

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