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प्रेम विवाह | ग्रह-नक्षत्र साथ दें तो होगी प्यार की जीत | पढ़िये पूरी खबर

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लव मैरिज के मामले में शुक्र, मंगल, चंद्रमा, राहु व केतु की अहम भूमिका होती है
सिटी लाइव टुडे, संवाददाता


कहते हैं कि हर इंसान को जिंदगी में एक बार सच्चा प्यार जरूर होता है। लेकिन कई प्रेम कहानियां मुकाम तक पहुंचती
हैं तो कई प्यार की जीत होती है। ग्रह-नक्षत्रों से प्रेम विवाह का क्या लेनादेना है इसी विषय पर ये खास रिपोर्ट पेश है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि कुछ ऐसे योग हैं जो प्रेम विवाह के लिये जरूरी हैं। लव मैरिज के मामले में शुक्र, मंगल, चंद्रमा, राहु व केतु की अहम भूमिका होती है। कहते हैं कि जन्मकुंडली मेें सातवें घर मंगल हो तो मांगलिक योग बनाता है लेकिन मंगल जब सातवें घर के स्वामी बृहस्पति के साथ हो या उसके साथ मधुर संबंध हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है।

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जन्मकंडली में किसी भी घर में मंगल व शुक्र एक साथ हो तो प्रेम विवाह के प्रबल योग बनते हैं।

इसी प्रकार से कुंडली में शुक्र, शनि व राहु के साथ हों या शुक्र से सातवें घर में हों या फिर अन्य स्थान से शनि, राहु शुक्र को देख रहे हों तो प्रेम विवाह का योग बनता है। इसी प्रकार से यदि शुक्र लग्न या सातवें घर के स्वामी के साथ हो तो भी प्रेम विवाह का योग बनता है।
पांचवें घर का स्वामी सातवें घर में हो और सातवें घर का स्वामी पांचवें घर में हो तो भी प्रेम विवाह होता है। शनि पांचवें घर का स्वामी होकर सातवें घर में हो और मंगल सातवें घर का स्वामी होकर पांचवें घर में विराजमान होकर प्रेम विवाह का योग बनाता है।
मंगल कुंडली के पांचवें घर के स्वामी के साथ हो या इसके द्वारा देखा जा रहा हो तो प्रेम विवाह होता है।
मंगल पांचवें घर में बैठा हो और पांचवें घर का स्वामी शनि उसे देख रहा हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है।
कुंडली में यदि शुक्र मंगल या राहु के साथ हो तो प्रेम विवाह हो सकता है लेकिन यहां प्रेम में समर्पण की जगह आकर्षण अधिक होता है।
कुंडली में पांचवें घर में शुक्र व चंद्रमा की युति बन रही हो और पंचम घर का स्वामी भी इसके साथ हो तो प्रेम विवाह का योग बनता है।

प्रेम विवाह का योग ग्रहों की स्थिति व प्रभाव के हिसाब से होता है। लव मैरिज के मामले में शुक्र, मंगल, चंद्रमा, राहु व केतु की अहम भूमिका होती है।
डा विपुल देव, ज्योतिषाचार्य

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डा विपुल देव, ज्योतिषाचार्य

ज्योतिष शास्त्र में जीवन की हर घटना ग्रहों के हिसाब से होती है। सो, प्रेम विवाह भी ग्रहों के योग व संयोग से होता है।
जितेंद्र प्रसाद जोशी, ज्योतिषाचार्य,

जितेंद्र प्रसाद जोशी, ज्योतिषाचार्य,

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