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नरेंद्रनगर 2027: चुनावी पेशबंदी और अटकलों की गरमाइश|Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

Election Special :  उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ टिहरी गढ़वाल की नरेंद्रनगर सीट पर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कैबिनेट मंत्री और मौजूदा विधायक सुबोध उनियाल लगातार पांचवीं जीत दर्ज करने की रणनीति के साथ मैदान में उतर सकते हैं, तो पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत

एक बार फिर उनके सामने चुनौती पेश करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, अंतिम तस्वीर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही साफ होगी।

पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़े को देखें तो नरेंद्रनगर में मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि दो प्रमुख चेहरों की व्यक्तिगत साख का भी रहा है। ऐसे में सवाल है कि क्या सुबोध उनियाल अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रख पाएंगे या ओमगोपाल रावत चुनावी समीकरण पलटने में सफल होंगे?

चार जीत के बाद भी चुनौती?
नरेंद्रनगर में वर्ष 2002 से 2022 तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में सुबोध उनियाल चार बार जीत दर्ज कर चुके हैं। वर्ष 2002 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्होंने भाजपा के लाखीराम जोशी को 1,531 मतों से हराया। लेकिन 2007 में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के ओमगोपाल रावत ने सुबोध उनियाल को महज चार मतों से शिकस्त देकर प्रदेश के सबसे करीबी चुनावी मुकाबले का इतिहास रचा।

वर्ष 2012 में सुबोध उनियाल ने कांग्रेस के टिकट पर वापसी की, और भाजपा के सिंबल पर लड़े ओमगोपाल रावत को 401 मतों से हराया। वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में सुबोध उनियाल की जीत का अंतर बढ़कर 4,972 हुआ। उस चुनाव में निर्दलीय मैदान में उतरे ओमगोपाल रावत दूसरे स्थान पर रहे।

फिर 2022 में दोनों के बीच का मुकाबला दिलचस्प हो गया। भाजपा के सुबोध उनियाल को 27,430 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ओमगोपाल रावत ने 25,632 मत हासिल किए। इस तरह सुबोध की जीत का अंतर घटकर 1,798 मत रह गया। यानी 2017 के मुकाबले जीत का अंतर 3,174 मत कम हो गया। यही आंकड़ा 2027 की सियासी चर्चा के केंद्र में बताया जा रहा है।

जीत का फासला सिमटा
वर्ष 2017 से 2022 के बीच सुबोध उनियाल के मतों में 3,326 की वृद्धि हुई, जबकि ओमगोपाल रावत के मत 6,500 बढ़ गए। नतीजतन, सुबोध की जीत का अंतर लगभग दो-तिहाई घट गया। सुबोध उनियाल कांग्रेस और भाजपा दोनों के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। वहीं, ओमगोपाल रावत यूकेडी से जीतने के बाद भाजपा, निर्दलीय और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। ऐसे में जीत का अंतर घटने का रुझान यह संकेत है कि नरेंद्रनगर असेंबली में 2027 का मुकाबला पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

तीसरे चेहरे से किसे मिलेगा फायदा?
सियासी जानकारों के मुताबिक 2027 में मुकाबले का गणित केवल सुबोध और ओमगोपाल तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पूर्व कांग्रेसी हिमांशु बिजल्वाण के निर्दलीय या यूकेडी के टिकट पर चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर भी नजर रहेगी। वर्ष 2017 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्हें 4,328 मत मिले थे। वहीं, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा की पुष्पा रावत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वर्ष 2022 में यूकेडी के सरदार सिंह पुंडीर को 2,187 और आम आदमी पार्टी की पुष्पा रावत को 698 मत मिले थे। पुष्पा रावत वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं, जबकि हिमांशु बिजल्वाण की पत्नी नीलम बिजल्वाण मुनिकीरेती नगरपालिका की अध्यक्ष हैं। ऐसे में इन नेताओं और उनके समर्थकों की चुनावी सक्रियता मुकाबले को नया मोड़ दे सकती है।

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आसान नहीं 2027 का रास्ता
नरेंद्रनगर की चुनावी जंग में तीसरे और चौथे प्रत्याशी कितने प्रभावी होंगे, यह उनके जनाधार और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा। यदि वे किसी प्रमुख प्रत्याशी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाते हैं, तो जीत-हार का अंतर प्रभावित हो सकता है। हालांकि, वोटों का बंटवारा किसके पक्ष में जाएगा, इसका अनुमान अभी लगाना जल्दबाजी होगी। फिलहाल सुबोध उनियाल के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ और लगातार जीत के रिकॉर्ड को बरकरार रखने की चुनौती है। जबकि ओमगोपाल रावत के लिए 2022 में बने नजदीकी मुकाबले को जीत में बदलना सबसे बड़ा लक्ष्य हो सकता है

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