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Uttarakhand News….संस्कृत दिवस समारोह का शुभारम्भ |Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मुख्यपरिसर हर्रावाला देहरादून में संस्कृतदिवससमारोह का शुभारम्भ डा. सुनील पाण्डेय, डा. प्रबोध येरावर, डा. आकांक्षा अनुपम, डा. अर्चना सिंह व डा. प्रदीप सेमवाल के द्वारा दीप प्रज्ज्वालन कर किया गया।

कार्यक्रम में प्रास्ताविक भाषण करते हुए संहिता सिद्धान्त एवं संस्कृत विभाग से डा. प्रदीप सेमवाल ने कहा कि संस्कृत भाषा आप्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का पोषण कर रही है। संस्कृत भारत की प्राण भाषा है संस्कृत हमारी धरोहर है। संस्कृत के बिना भारतीयता की कल्पना सम्भव नहीं है। संस्कृत की वैज्ञानिकता को देखते हुए आज विश्व के लोग संस्कृत भाषा को सीखने व व्यवहार में प्रयोग करने के लिए बढचढकर आगे आ रहे हैं। आज के युग में भी संस्कृति और संस्कारों को सुरक्षित करने के लिए प्रत्येक घर में संस्कृत भाषा को महत्वपूर्ण स्थान देने की आवश्यकता है। जब संस्कृत भाषा घर – घर में पहुंचेगी तब लोग संस्कृत शास्त्रों को जानेंगे व भारत राष्ट्र पुनः एक बार विश्वगुरु बनेगा।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डा. प्रबोध येरावर ने कहा कि संस्कृत सभी विद्याओं का मूल है। उसी प्रकार से आयुर्वेद का मूल भी संस्कृत है। अतः हमें पूर्ण मनोयोग से संस्कृत को पढ़ना, लिखना व बोलना चाहिए।

डा. एस . पी सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत के मन्त्र के वाचन से हमारी मनन शक्ति का विकास होता है। संस्कृत प्राचीन काल से ही हमारी बुद्धि विकास में सहायता करती रही है और आज के युग में इसकी बहुत आवश्यकता है। उन्होंने प्रतिदिन श्लोक व मन्त्र पढने के लिए छात्रों को प्रेरित किया।

सभा को सम्बोधित करते हुए डा. अर्चना सिंह ने कहा कि एक चिकित्सक के रूप में एक रोगी की आत्मा तक पहुंचने के लिए आयुर्वेद की आत्मा में पहुंचना आवश्यक है और की आत्मा में पहुंचने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है।

डा. आशुतोष चौहान ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृत हमारी संस्कृति है हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए।

डा. दीपक सेमवाल ने कहा कि संस्कृत हमारे राज्य में द्वितीय राजभाषा के रूप में विद्यमान है। यदि इसमें उद्योग अवसरों की वृद्घि होगी तो जो आज संस्कृत से दूर हैं वे भी संस्कृत का महत्व समझकर अवश्य ही संस्कृत सीखेंगे।

डा सुनील पाण्डेय ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमें संस्कृत को इसलिए जानना जरूरी है कि केवल अनुवादित ग्रन्थों से वास्तविक तथ्यों का पूर्ण ज्ञान नहीं प्राप्त होता है। इसलिए संस्कृत ग्रन्थों का ज्ञान मूल भाषा से ही प्राप्त होता है।

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इससे पूर्व कार्यक्रम में नैना, ईशा, संजना, कंचन ने धन्वन्तरी वन्दना, अंशुल, मयंक, रोहन, और कृष्ण गोपाल मीणा ने ध्येयमन्त्र, अंजली, अनामिका और आराध्या ने स्वागत गान, अराध्या और अंजली ने संस्कृत नृत्य, अभिषेक और सोनिया चौहान ने शिवतांडव स्तोत्र, मैसर, प्रियंका कन्याल, प्रभात ने सुभाषित पाठ, अंजली, अभिषेक, अंशिका कुकरेती, प्रियंका कन्याल, योगेश नौटियाल, सागर ने श्रीकृष्णकर्णसंवाद पर आधारित महाभारत कर्णस्य द्वन्द्वम् नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन दीक्षा व अरीना ने किया। कार्यक्रम में सभी विभागों के शिक्षक, चिकित्सक, कर्मचारी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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