Pauri..” खैरालिंग कौथिग ” उमड़ा आस्था का सैलाब, धर्म-अध्यात्म के रंग में रंगा तन-मन| जगमोहन डांगी की Report

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-जगमोहन डांगी, कल्जीखाल

जनपद पौड़ी के कल्जीखाल विकास खंड के अंतर्गत पट्टी असवालस्यूं स्थित प्रसिद्ध मुंडेश्वर महादेव मंदिर में दो दिवसीय ऐतिहासिक मुंडेश्वर (खैरालिंग) मेले का शुभारंभ बेहद भव्य और श्रद्धाभक्ति माहौल में हुआ। मेले के पहले ही दिन बाबा खैरालिंग के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को दूसरे दिन भी यहां भव्यता व दिव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। चारों ओर जयकारों व जयघोषों की दिव्य ध्वनियां तन व मन में नई ऊर्जा का संचार कर रही हैं।

परंपरागत रूप से स्थापित हुए मां देवी के निशान
मेले की शुरुआत सदियों से चली आ रही अनूठी परंपरा के अनुसार हुई। इस बार पट्टी असवालस्यूं के ग्राम थैर, ग्राम रिठौली और ग्राम सकनोली से मां देवी के पावन निशान (ध्वज) पारंपरिक वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊ की थाप और जयकारों के साथ मंदिर परिसर पहुंचे, जिन्हें शुभ मुहूर्त में स्थापित किया गया। जैसे ही देवी के निशान मंदिर में चढ़ाए गए, पूरा परिसर बाबा खैरालिंग महादेव” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धालुओं ने लाइन में लगकर बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया।


प्रवासियों की घर वापसी से गांवों में लौटी रौनक
इस दो दिवसीय ऐतिहासिक मेले को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह है। मेले में तीनों पट्टियों के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ सतपुली, पौड़ी और देश के विभिन्न महानगरों से भारी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी अपने गांवों को लौटे हैं। निशान चढ़ने की रस्म के बाद कौथिगेरियों (मेला देखने आए लोगों) और श्रद्धालुओं ने मेले का भरपूर लुत्फ उठाया और जमकर खरीदारी की।

सांस्कृतिक धरोहर हैं हमारे पौराणिक मेले रचना बुटोला
मेले के प्रथम दिन मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रचना बुटोला ने शिरकत की। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पौराणिक और ऐतिहासिक मेले हमारी समृद्ध संस्कृति की अनमोल धरोहर हैं। इन मेलों का संरक्षण करना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। उत्तराखंड सचमुच देवभूमि है, जहां के कण-कण और हर गांव में देवी-देवताओं का वास है। जून के महीने में होने वाले इन धार्मिक आयोजनों के बहाने हमारे प्रवासी भाई-बहन भारी संख्या में अपनी थात (गांव) लौटते हैं, जिससे उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का बेहतरीन अवसर मिलता है। यह मेला हमारी श्दिशा-ध्याणियों (बेटियों-बहनों) के लिए भी अपने मायके और अपनों से मिलने का एक भावुक जरिया है।
श्रीमती बुटोला ने मेले में चाक-चैबंद और बेहतरीन व्यवस्थाओं के लिए मंदिर समिति की जमकर सराहना की और धन्यवाद दिया।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान
इस मौके पर पूर्व विधायक मुकेश कोली, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के कला संस्कृति निष्पादन केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणि, गढ़कोट की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सविता देवी और कोट ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख उपेंद्र भट्ट ने भी उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया और मेले की शुभकामनाएं दीं।
मंदिर समिति के अध्यक्ष अनिल नेगी ने मेले को शांतिपूर्ण और भव्य ढंग से संपन्न कराने में सहयोग के लिए सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। समिति द्वारा मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों को मुंडेश्वर महादेव मंदिर का स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में मंदिर समिति के उपाध्यक्ष जसपाल सिंह नेगी, सचिव विवेक नेगी (टोनी) और समिति के सभी सदस्यों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। कार्यक्रम का सफल और सुंदर मंच संचालन पूर्व जिला पंचायत सदस्य (गढ़कोट) संजय डबराल श्मिंटूश् ने किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं आकर्षण का केंद्र
मेले के पहले दिन युवाओं के बीच बेहद चर्चित और लोकप्रिय मांगलिकध्लोक गायक नवीन बिष्ट मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने मंदिर परिसर के मंच से एक से बढ़कर एक सुंदर मांगलिक गीतों और उत्तराखंडी लोक गीतों की बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंदिर समिति द्वारा उन्हें भी अंगवस्त्र ओढ़ाकर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।