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उर्मिल काला “निर्मल” आदर्श अध्यापक, प्रतिभा के धनी कवि,लेखक व रचनाकार।।द्वारीखाल से जयमल चन्द्रा की रिपोर्ट।।

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पहाड़ों को प्रकृति ने जहां खूबसूरत नियति दी है,वहीं यहां बेजोड़ प्रतिभाओ की भी कमी नही है,आवश्यकता है इनको निखारने की व मंच प्रदान करने की।ऐसी ही एक साहित्यिक प्रतिभा के धनी है,अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज चैलूसैण के अध्यापक उर्मिल काला।


उर्मिल काला “निर्मल” का जन्म 8जून 1969को ग्राम-भैड़गांव,पट्टी -लंगूर डाडमंडी के निकट,द्वारीखाल ब्लाक में,स्व.श्री भगवन्त प्रसाद काला के घर पर हुआ तथा,इनकी माता का नाम सुपर्णा देवी है। वे एक अच्छे कवि व लेखक है।उनकी सर्वप्रथम रचना , प्रर्यावरण संदेश है।तथा इन्होंने गढ़वाली में एक पुस्तक *हल्या,व हिन्दी में तीसरी पुस्तक निर्मल वाणीकी रचना भी की है।साथ ही साथ गढ़वाली फिल्मी एलवम चांदसीचकोरीमें गढ़वाली फिल्मी गीत लिखे हैं।

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इन्होंने 2009से लेखन कार्य का शुभारंभ किया, तथा उनकी पुस्तक का विमोचन साहित्यिकसाहित्यांचलसंस्था कोटद्वार द्वारा किया गया।उस समय इस संस्था के अध्यक्ष श्री जे .पी.बलूनी व द्वारीखाल ब्लाक के पूर्व बी ई ओ श्री दिवाकर दत्त जदली के कर कमलों के द्वारा हुआ।


जबकि निर्मल वाणीका विमोचन शैलवाणी साप्ताहिक पत्रिका के द्वारा 2015में ,श्री डां.रामप्रसाद ध्यानी जी ,पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री सुमन कोटनाला, तथा बरिष्ठ साहित्यकार श्री योगेश पांथरी जी के कर कमलों के द्वारा हुआ।

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उर्मिल काला निर्मल द्वारीखाल के एक उभरते हुए साहित्य कार व कवि,लेखक है।बर्तमान में भी उनकी कलम का जादू लगातार चल रहा है।पलायन,बेरोजगारी,शिक्षा जैसे ज्वलन्त विषयो पर कविताओं व लेखों के द्वारा वे आम लोगो को लगातार जागरूक कर रहे है।आप रा.इ.का.चेलूसैंण में गणित के शिक्षक भी है तथा ज्योतिष के भी एक अच्छे ज्ञाता हैं।ज्योतिष पर भी उनके अनेको लेख प्रकाशित हो रहे है।तथा क्षेत्र में सांस्कृतिक , सामाजिक कार्यों में उनका बिशेष योगदान रहता है।वे विद्यालय में भी अनेक अवसरों पर विभाग के द्वारा प्रशिक्षण कार्यो में एम.टी.संदर्भदाता में भी अच्छे प्रशिक्षण सम्बन्धित ज्ञान रखते हैं।

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