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Satpuli News…..मलेठी में श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस| श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बखान| जगमोहन डांगी की Report

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सिटी लाइव टुडे, सतपुली, पौड़ी गढ़वाल- जगमोहन डांगी

पौड़ी । सतपुली क्षेत्र के ग्राम मलेठी में प्रमुख समाजसेवी स्वर्गीय ठाकुर सुंदर सिंह चौहान की प्रथम पुण्यतिथि से पूर्व उनकी पुण्य स्मृति में आयोजित तीर्थमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पंचम दिवस पर गहन आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। बारिश के बावजूद सतपुली व आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पहुंचे।


कथा वाचक आचार्य हिमांशु गैरोला ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि “नंद के घर स्वयं आनंद ने जन्म लिया।” उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण साक्षात आनंद स्वरूप हैं, और जीवन में सच्चे सुख की प्राप्ति के लिए भगवान का ध्यान आवश्यक है।


आचार्य गैरोला ने अपने प्रवचन में जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दया धर्म का मूल है, संतोष सबसे बड़ा धन है और मानव जीवन अत्यंत बहुमूल्य है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि जीवन के प्रत्येक क्षण को भक्ति और सत्कर्मों में लगाकर सार्थक बनाएं।
इस पावन अवसर पर उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, कोटद्वार और पौड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में दिग्मोहन सिंह नेगी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र सिंह असवाल एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुसुम असवाल, क्षेत्रीय उत्थान समिति कोटद्वार के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य हिमांशु गैरोला का माल्यार्पण कर स्वागत किया और कथा का श्रद्धापूर्वक रसपान किया। सभी ने सामूहिक आरती में भाग लेकर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया।


मुख्य यजमान के रूप में स्वर्गीय सुंदर सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती दर्शनी देवी एवं श्रीमती सोनी देवी,ज्येष्ठ पुत्र त्रिलोक सिंह चौहान तथा कनिष्ठ पुत्र नगर पंचायत सतपुली के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान सहित परिवार के अन्य सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कथा का लाभ उठा रहे हैं। पुरोहित मंडली में सरितानंद डुकलाण, शम्भू प्रसाद, प्रयागदत्त गैरोला, मुकेश जखमोला, अमन डुकलाण, विकास पोखरियाल, रूक्मेश नौटियाल, संदीप बथवाल, अंकित भट्ट और अमित गैरोला सहित अन्य विद्वान शामिल रहे।

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