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आखिर कुछ तो बात रही होगी इन 90 हीरों में| साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

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सिटी लाइव टुडे, वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

धामी सरकार ने आखिरी गेंदों में ‘अंट-शंट’ बैटिंग करते हुए बड़ा ‘स्कोर’ तो किया, लेकिन कुछ शॉट इतने बेहूदा थे कि इनका साया 10 मार्च के नतीजों पर न पड़ जाए। सूबे के सबसे बड़े महकमें में 90 मास्साब और साहिबों को एक झटके में बिना किसी नियम कायदे के देहरादून और हरिद्वार उतार दिया गया। समझ से परे तो यह है कि इन पर इतनी दरियादिली दिखाई गई कि कईयों को तो बाकायदा विकल्प भी दे दिए गए, कि जहां आपको उचित लगे वहां नौकरी पका लीजिये। कुछ को तो पूरे जिले में कहीं भी एडजस्ट होने की खुली छूट दे दी गयी, कुछ को तो मास्साब से जिला स्तर का साब तक बना दिया गया। सवाल तो उठता ही है आखिर कुछ तो बात रही होगी इन 90 हीरों में..!

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वहीं, 4 डंपरों के चालान छुड़वाने के मामले में सीएम ऑफिस की भयंकर इंसल्ट करवा चुके एक ओएसडी को कुछ दिनों के दिखावी टर्मिनेशन के बाद बहाल करने के पीछे क्या मज़बूरी रही होगी..यह मेरे जैसे औसत समझ वाले पहाड़ी की तो समझ से परे है।
वहीं, नई खनन नीति के तहत आवंटित पट्टों पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने वाले आदेश को किस प्रकार से तकनीकी रूप से छिन्न भिन्न किया गया वह भी सवालों के घेरे में है.

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