चौबट्टाखाल| सड़क निर्माण को लेकर ” श्रेय ” की नेतावाणी| पढ़िये पूरी खबर

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विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख राजनीतिक दल मतदाताओं और जनता को रिझाने के लिए अपने अपने विकास के दावे करने लगे हैं। ऐसा ही होता हुआ कुछ चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में बीरोंखाल ब्लॉक के अन्तर्गत स्यूंसी आमकुलाऊं सड़क मार्ग निर्माण कार्य शुरू होने से पहले दिखाई दे रहा है। यहां जहां क्षेत्र के विधायक और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस सड़क का शिलान्यास कुछ समय पहले किया था, तब माना जा रहा था कि क्षेत्र के लोगों की मांग के अनुरूप सड़क बन जाएगी। अब इस सड़क का निर्माण शुरू होने जा रहा है।

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अब इस पर श्रेय लेने की होड़ लगनी शुरू हो गई है। यहां कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश बिष्ट ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए दावा किया है कि इस सड़क की घोषणा राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने साल 2016 में की थी।
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने सड़क शुरू होने से पहले क्षेत्रीय जनता को सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के मौके पर पहुंचने को लेकर खुला निमंत्रण दिया है। बिष्ट ने स्थानीय जनता से 28 नवंबर को सुबह 10:00 बजे क्षेत्र के तमाम लोगों को सड़क निर्माण स्थल पर पहुंच कर अपनी भागीदारी अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर विकास के रास्ते पर चलने की अपील की है।

अब देखना यह है कि सड़क निर्माण का श्रेय वाकई में बीजेपी को या कांग्रेस को वोट के रूप में मिल पाता है। फिलहाल कांग्रेस ब्लॉक संगठन ने इस सड़क निर्माण का श्रेय लेने का दावा कर यहां सियासी पासा फेंक दिया है। अब देखना यह है कि इस पर बीजेपी सहित क्षेत्रीय विधायक सतपाल महाराज और बीजेपी संगठन कांग्रेस के श्रेय लेने के दावे का जवाब किस रूप में देती है। हां इतनी तथ्यात्मक सियासी सच्चाई यह जरूर है कि पूर्व प्रदेश सरकार में बतौर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्यूंसी में तहसील की घोषणा कर उसका शासनादेश जारी किया था। यह तहसील अब करीब करीब अस्तित्व में आ गई है, जिस पर स्थाई तौर पर बाकायदा तहसीलदार की नियुक्ति कर दी गई है।

इसका क्षेत्रीय जनता को बड़ा लाभ पहुंच रहा है। तत्कालीन सरकार के ये फैसले आज धरातल पर नजर आने लगे है। हालांकि यहां एक झील का निर्माण होना था, जिसकी परिकल्पना राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के बनने से पहले से की गई है। स्थानीय लोगों की मांग के बाद तत्कालीन पर्यटन मंत्री लिफ्टनेंट जनरल टीपीएस रावत ने इसका स्थलीय निरीक्षण किया था, इसके बाद इसके निर्माण को लेकर टोकन मनी जारी कर दी गई थी। लेकिन उसके बाद कई सालों तक इस पर बात एक भी कदम आगे नहीं बढ़ पाई। साल 2017 में भाजपा सत्ता में आई और सतपाल महाराज यहां से विधायक निर्वाचित हुए।

उन्हें राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री बनाया गया तो, लोगों की झील निर्माण की मांग एक बार जोर मारने लगी। इस बीच लोक सभा चुनाव हुए कई बार सरकारी मंच से झील निर्माण को लेकर बड़ी बड़ी बातें हुई। तकनीकि स्वीकृति और तमाम औपचारिकताओं के बाद झील की डीपीआर तैयार होने और भारत सरकार से नाबार्ड के जरिए वित्तीय मदद मिलने की खबरें यहां मीडिया की सुर्खियां जरूर बनी पर धरातल पर अभी तक इस दिशा में कोई काम शुरू होता नहीं दिख पाया। पर्यटन मंत्री जल्द झील निर्माण की बात कई बार कर चुके हैं। लेकिन अब लोग इसे ज्यादा गंभीरता नहीं ले रहे। हालांकि क्षेत्र की जनता चुनावी मौसम आते आते सब समझने लगी है।

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अब देखना ये है कि सड़क निर्माण के बाद कांग्रेस झील निर्माण को लेकर आखिर क्या स्टैंड लेती है, क्योंकि पूर्व सीएम हरीश रावत की उन तमाम महत्वपर्ण घोषणाओं में यहां पूर्वी नयार पर खूबसूरत झील बनाया जाना भी शामिल था।

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