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Haridwar News….हमें राज्य के अधीन किया जाए.. सौंपा ज्ञापन|Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

कर्मचारियों की पूर्व से चली आ रही मांग ऋषिकुल, गुरुकुल राजकीय चिकित्सालय/कॉलेज के कर्मचारियों को पूर्व की भांति राज्य के अधीन कर दिया जाए जिससे विश्वविद्यालय के अंतर्गत रहकर कर्मचारियों का जो शोषण हुआ है उससे राहत मिल सके। जिसके लिए एक ज्ञापन परिसर निदेशक ऋषिकुल आयुर्वेदिक, चिकित्सालय,कालेज हरिद्वार को एक ज्ञापन विश्वविद्यालय हर्रावाला से अलग कर राज्य सरकार/शासन के अधीन कर दिया जाए जिसमें चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड के साथ -साथ लिपिक संवर्ग द्वारा भी एक स्वर में कहा कि हमें राज्य के अधीन किया जाए।


प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा, प्रदेश संगठन सचिव छत्रपाल सिंह, जिला मंत्री राकेश भंवर, वरिष्ठ नेता अनिल नेगी, ने कहा कि 2015 से जब से विश्विद्यालय के अधीन आने के बाद कर्मचारी घुट घुट कर जी रहा है कर्मचारियों समय से वेतन न मिलना, कर्मचारियों को सेवा निवृत्त होने के पश्चात पेंशन और देयकों को मिलने में साल साल भर लगना, कर्मचारियों के जी पी एफ, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, समय से न मिलना वेतन न मिलने के कारण बैंक में लोन डिफॉल्टर होना इस तरह की आर्थिक और मानसिक परेशानियों के लिए परिसर निदेशक के साथ साथ, सचिव आयुष, आयुष शिक्षा, माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय आयुष, आयुष शिक्षा मंत्री, माननीय कुलपति, कुल सचिव उत्तराखंड को भी पत्र भेज कर राज्य के अधीन करने की मांग की है।

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प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर,मंत्री उपशाखा ऋषिकुल अजय कुमार, उपाध्यक्ष नितिन कुमार ने कहा कर्मचारियों को वर्दी भत्ता नहीं दिया जा रहा है, कर्मचारियों का एन पी एस में फंड कट रहा है, ई इस आई कट रहा है कर्मचारियों की अन्य परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है इसलिए ऋषिकुल गुरुकुल को पूर्व की भांति राज्य के अधीन कर दिया जाए अन्यथा कर्मचारी अग्रिम रणनीति बनाकर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे जिसका उत्तरदायित्व आयुर्वेद विश्विद्यालय प्रशासन/शासन का होगा।
ज्ञापन देने वालों में दिनेश लखेडा, अनिल नेगी, छत्रपाल सिंह, अनूप डिमरी, के चंद्रा, अमित कुमार,राकेश भंवर, अजय कुमार, अशोक चंद्र,राजेन्द्र तेश्वर बीना शुक्ला, मंजू पांडे, बाला देवी, बृजेश, कैलाशो, नितिन कुमार, सुरेंद्र सिंह, प्रवीण पुरोहित, सतीश, कमल, कल्लू, इत्यादि शामिल थे जल्द ही निस्तारण न होने पर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

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