टिहरी के विपिन ज़रदारी @ बीज बचाओ की तपस्या में लीन ” तपस्वी ” | Click कर पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे, टिहरी गढ़वाल


टिहरी गढ़वाल के विपिन जरदारी की तपस्या के भी क्या कहने। पहाड़ की माटी से अगाध स्नेह और यहां के बीजों को संरक्षित व प्रचारित करने का जज्बे को भी सलाम। सही मायनों में कहा जाये तो विपिन दा कमाल के हैं और कार्य भी कमाल का। परंपराग बीजों की प्रदर्शनी देश के कई राज्यों में लगा चुके हैं। इनके पास बीजों का खजाना है और बीजों के ज्ञान का भी भंडार भी।
प्रकृति प्रेम व उत्तराखंड के परंपरागत बीजों की यह तपस्या सालों से चली आ गयी है। समय-समय पर चुनौतियां भी आती रही लेकिन तपस्या कठोर रूप लेती रही। विपिन जरदारी बीज बचाओ आंदोलन पर पूरे भारत वर्ष में अनेकों प्रदर्शनियों और आयोजनों में जाते हैं।


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उत्तराखंड के अनाजों सब्ज़ियों दालों फलों के जैविक प्राकृतिक बीजों को बचाने की अपील भी करते हैं और इनके पास तक़रीबन 150 प्रकार से ऊपर हर तरह के बीज भी मिलते हैं जिनको यह विक्रय भी करते हैं। यही हमारी जल जंगल ज़मीन के सच्चे नायक भी हैं। केवल पहाड़ी राजमा की 220 प्रकार इनके पास हैं। आज आसाम और मेघालय अपनी परम्परागत खेती के जैविक उत्पाद विश्व को निर्यात कर रहा है। उसी प्रकार हम भी इस देवी रूपी देवभूमि में होने वाली जैव विविधता से बहुत लाभ उठा सकते हैं। ज़रूरत है इनको इनकी सही पहचान दिलाने की। इनकी nutrient evaluation की। International standards पर इनकी प्रमोशन और किसानों को विशेष technical expertise पहुँचाने की ।

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