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योगी की कोटद्वार रैली से किन सीटों पर पड़ेगा असर| पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस


सियासत की धार पैनी हो रखी है। मैदान मारने को इस पैनी धार को और पैनी करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रहने दिया जा रहा है। यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की कोटद्वार व रूड़की रैली होनी है। उत्तराखण्ड में सियासत की हवा का रूख बदलने के लिए तीन दिन प्रधानमंत्री मोदी की रैली श्रीनगर, अल्मोड़ा और हल्द्वानी में प्रस्तावित है। वहीं दूसरी ओर यूपी के मुख्यमंत्री जो भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारकों में से जाने जाते हैं, उनकी रैली रूड़की एवं कोटद्वार में 10 फरवरी को होनी तय है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली कोटद्वार में होने से काफी कुछ समीकरण बन जायेगें। एक तो वह हिंदुत्व के सबसे बड़े स्टार बन चुक हैं, वहीं कोटद्वार में तरूण अवस्था और विद्यार्थी जीवन की यादें उनकी जेहन में हैं, जिससे कोटद्वार की जनता का अगाध स्नेह उनके प्रति है। कोटद्वार में योगी की रैली से जहॉ भाजपा से नाराज चल रहे लोग भी उनके भाषण और रैली से अवश्य प्रभावित होंगे।

कोटद्वार में बीजेपी ने यमकेश्वर की निवर्तमान विधायक ऋतु खण्डूरी को मैदान में उतारा है, और शुरूआती दौर में जहॉ ऋतु खण्डूरी के लिए यह सीट चुनौती भरी मानी जा रही थी, लेकिन उसके बाद जिस तरह से ऋतु खण्डूरी ने कोटद्वार में सभी नाराज लोगों को साधने के साथ कोटद्वार की जनता का प्यार पाने में कामयाब होते दिखाई देने लगे, ऐसे में उनके लिए स्टार प्रचारक और हिंदुत्व के सबसे ब़ड़े ब्रांड योगी आदित्यनाथ की रैली सोने पर सुहागा वाला काम करेगी। योगी की रैली से भाजपा को कोटद्वार में काफी मजबूती मिल सकती है।

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योगी आदित्यनाथ की रैली से उनके जन्मभूमि यमकेश्वर विधानसभा, लैंसडाउन विधानसभा, हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा भी अवश्य प्रभावित होगी। इसके साथ ही उत्तरप्रदेश की नजीबाबाद, धामपुर और नगीना विधानसभा पर भी इसका असर स्पष्ट दिखाई देगा। कहीं ना कहीं योगी की रैली अतिंम समय में अन्य दलों का समीकरण बिगाड़ने का काम करेगी। ़ऋतु खण्डूरी को अपनी जीत के लिए रास्ते में आने वाले छोटी मोटी बाधायें काफी दूर हो सकती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि योगी आदित्यनाथ के भाषण और उनकी कुशल वाकवाणी का प्रभाव कितना कुछ पड़ता है, यह तो रैली देखने और 14 फरवरी को हुए मतदान के बाद आने वाले 10 मार्च के बाद ही पता चल पायेगा, लेकिन योगी के आने से समीकरणों में बदलाव आने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

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