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द्वारीखाल | स्कूलों का हाल-बेहाल | घट रही छात्र संख्या | द्वारीखाल से जयमल चंद्रा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा, द्वारीखाल


पलायन की मार से खेती-किसानी ही नहीं पड़ी है बल्कि शिक्षा केन्द्र यानि स्कूल भी बेहाल हैं। दूसरे शब्दांे में कहें तो पहाड़ के स्कूलों से छात्र भी तेजी से पलायन करने लगे हैं। पहाड़ के स्कूलों में कम होती छात्र संख्या इसको प्रमाणित करती हैं। जिक्र एक बार फिर द्वारीखाल ब्लाक का कर रहे हैं। द्वारीखाल में भी स्कूलों में छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। नतीजतन, कई स्कूलों पर ताले लग गये और कई बंदी के कगार पर हैं।

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आजादी से पूर्व का विद्यालय प्राथमिक विद्यालय कल्सी का ही हाल देखियेगा। यहां पहले 10-10 किलोमीटर दूर से विद्यार्थी आकर शिक्षा प्राप्त करते थे। उसी विद्यालय को आज विद्यार्थी न होने का ग्रहण लग गया है। यह शिक्षा केन्द्र मात्र इमारत बन कर रह गया है। विद्यालय बन्द हो गया है। यह व्यथा मात्र प्राथमिक विद्यालय कल्सी की ही नहीं है बल्कि ब्लॉक द्वारीखाल में स्थित कई विद्यालयों की है, जो बन्द हो चुके हैं। गौर करने वाल बात यह है कि कई विद्यालय में छात्र संख्या 2, 4, 5 या 10 से भी नीचे है। जो धीरे-2 बन्द होने की कगार पर है।

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सवाल ये उठता है कि जब हमारे पूर्वजों शासन -प्रसाशन में गुहार लगाकर इन विद्यालयों का निर्माण करवाया था तो आज इनकी इस दशा का जिम्मेदार कौन है। आज इस सवाल का जवाब हमे खोजना ही पड़ेगा। नहीं तो विद्यालयों की ही तरह इन पहाड़ी गांवो का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा।इन सवालों का जवाब में आम ग्रामीणों,विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षकों,जनप्रतिनिधियांे, शासन-प्रसाशन के जमीर पर छोड़ते हैं।

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