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केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि जीवित रखना और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ना भी जरूरी |Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

भारतीय चिकित्सा परिषद एवं ग्रीन हिमालया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में देहरादून में पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. आशुतोष पंत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण मानव जीवन के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं संतुलित भविष्य के लिए भी आवश्यक है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का विषय बनना चाहिए।


मुख्य अतिथि डॉ. आशुतोष पंत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से किए जा रहे अपने व्यक्तिगत प्रयासों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने अभियान के तहत उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों, गांवों एवं स्थानीय समुदायों में पौधों तथा फलदार पौधों का निःशुल्क वितरण एवं रोपण किया है। उनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित निजी ‘ग्रीन कैंपेन’ के अंतर्गत अब तक 4.62 लाख (4,62,000) से अधिक पौधे लगाए एवं वितरित किए जा चुके हैं।


भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. नौटियाल ने डॉ. आशुतोष पंत का स्वागत करते हुए उनके पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. पंत ने अपने सेवाकाल के प्रारंभिक दौर से ही अपनी आय का एक हिस्सा पौधे खरीदने और उन्हें लगाने के कार्य में लगाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार का व्यक्तिगत समर्पण समाज के लिए प्रेरणादायी है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार प्रकृति संरक्षण में योगदान देना चाहिए । राज्य की वन संपदा, जल स्रोत, जैव विविधता एवं हिमालयी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण के साथ-साथ लगाए गए पौधों की देखभाल एवं संरक्षण भी आवश्यक है। केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखना और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़ना भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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भारतीय चिकित्सा परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती नर्मदा गुसाईं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की आवश्यकता है। यदि वर्तमान पीढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों के सामने जल, वायु, वन एवं जैव विविधता से जुड़ी गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
भारतीय चिकित्सा बोर्ड सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह राणा ने अपने संबोधन की शुरुआत संस्कृत के श्लोक से की—“दशकूप समा वापी, दशवापी समो ह्रदः।
दशह्रद समः पुत्रो, दशपुत्र समो द्रुमः॥”
उन्होंने कहा कि मत्स्य पुराण में वर्णित इस श्लोक के माध्यम से वृक्ष एवं प्रकृति के महत्व को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
कार्यक्रम में भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. जे.एन. नौटियाल, रजिस्ट्रार श्रीमती नर्मदा गुसाईं, सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह राणा, डॉ. हर्ष धामी, डॉ. डिमरी एवं डॉ. नवानी, डिप्टी रजिस्ट्रार संदीप सेमवाल सहित ग्रीन हिमालया फाउंडेशन की अध्यक्षा रितिका राणा, उपाध्यक्ष मनीता रावत एवं राजीव चौहान समेत कुलदीप, माधुरी, जयवीर पुंडीर, सपना पांडे, पूनम राणा, धीरज राणा, अरिहंत राणा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संदीप तोपवाल ने किया।

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