उत्तराखंडसंपादकीय

Aiims News..’ वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे ‘ के उपलक्ष्य में एक खास ‘ माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी वर्कशॉप ‘ का आयोजन|Click कर पढ़िये पूरी News

Share this news

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

एम्स, ऋषिकेश के बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के तत्वावधान में ‘वर्ल्ड प्लास्टिक सर्जरी डे’ के उपलक्ष्य में एक खास ‘माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। जिसके माध्यम से विभाग ने सर्जिकल शिक्षा, इनोवेशन और मरीज़ों की देखभाल में बेहतरीन कार्य करने के अपने संकल्प को दोहराया।


वर्कशॉप में फैकल्टी सदस्य, प्लास्टिक सर्जरी रेजिडेंट्स और सर्जिकल ट्रेनीज़ एक साथ आए, जिससे सभी सामुहिकतौर पर माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी के सिद्धांतों और तकनीकों के बारे में गहराई से प्रशिक्षित हो सकें और प्रैक्टिकल अनुभव से रूबरू हो सकें।


कार्यक्रम में आधुनिक रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी (शरीर के अंगों को फिर से बनाने वाली सर्जरी) में माइक्रोसर्जिकल स्किल्स के महत्व पर ज़ोर दिया गया, जिनमें खासकर जटिल चोटों, कैंसर के बाद रिकंस्ट्रक्शन, अंग बचाने (लिम्ब साल्वेज) और अंगों की कार्यक्षमता बहाल करने आदि मामले प्रमुखरूप से शामिल रहे। इस दौरान प्रतिभागियों ने अनुभवी फैकल्टी सदस्यों की देखरेख में माइक्रोवैस्कुलर एनास्टोमोसिस की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी ली, जिससे उन्हें ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और माइक्रोसर्जिकल उपकरणों का इस्तेमाल करके अपनी सर्जिकल कुशलता और सटीकता को बेहतर बनाने में मदद मिली।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ. ) मीनू सिंह ने बताया कि माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी से रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। माइक्रोवैस्कुलर सर्जनी ने जीवित ऊतकों (टिश्यू) को उनकी रक्त आपूर्ति (ब्लड सप्लाई) के साथ ट्रांसफर करना संभव बना दिया है, जिससे जटिल समस्याओं वाले मरीज़ों के अंगों का आकार और कार्यक्षमता दोनों बहाल हो पाते हैं।


निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह ने मरीज़ों के बेहतर इलाज के नतीजों के लिए व्यवस्थित वर्कशॉप और सिमुलेशन-आधारित ट्रेनिंग के ज़रिए लगातार स्किल्स को बेहतर बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।


बर्न्स और प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) विशाल मागो ने चेहरे और पैरों की जटिल समस्याओं के इलाज में माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी की भूमिका को दोहराया और भविष्य में ऐसी अन्य कार्यशालाएं आयोजित करने पर ज़ोर दिया, ताकि एम्स और अन्य संस्थानों के रेजिडेंट्स को इस महत्वपूर्ण विषय पर दक्षता प्रशिक्षण दिया जा सके।

ad12


कार्यशाला में संस्थान के डीन एकेडमिक्स प्रोफेसर (डॉ.) सौरभ वार्ष्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्य श्री, विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉ. देबरती, डॉ. मधुबरी वाथुल्या, डॉ. अक्षय कपूर आदि शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *