Haridwar news..Parmotion के नाम पर ” मीठी गोली ” अब आंदोलन होकर ही रहेगा|Click कर पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-हरिद्वार


मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी पदोन्नति व अन्य मांगे पूरी नहीं होने से अब सब्र का बांध टूटने लगा है। एक बार फिर
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ उत्तराखंड ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन भेजा है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करने का भी आगामी कार्यक्रम है। शीघ्र ही मांगंे पूरी नहीं होने पर आंदोलन का भी मूड़ बन रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा प्रदेश महामंत्री सुनील अधिकारी प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत प्रदेश उपाध्यक्ष नेलसन अरोड़ा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर न तो महानिदेशालय और न ही शासन ध्यान दे रहा है एक प्रदेश में दो कानून लागू हो रहे हैं पशुपालन विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की वेक्सीनेटर के पद पर पदोन्नति कर दी गयी जिसमे296 पद स्वीकृत किये गए और उद्यान विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को उद्यान सहायक बना दिया गया उनको टेक्निकल घोषित करते हुए उनका ग्रेड पे4200 कर दिया गया जबकि स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारी अन्य विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से उनका कार्य भिन्न है कोरोना काल में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना रोगियों की सेवा की ऑक्सीजन गैस प्लांट में कार्य किया, 

ओ टी में स्टरलाइजेशन, वार्ड में ड्रेसिंग,मरीज की बोतल बदली, जरूरत पड़ने पर टांके लगाना, ब्लड बैंक /लेब में टेक्निकल कार्य करना सफाई सेवक पोस्टमार्टम में चिकित्सक के निर्देशानुसार चिर फाड़ का कार्य,किन्तुउसके बाद भी न तो हमारी पदोन्नति, न ही हमको टेक्निकल किया गया और उद्यान विभाग के माली टेक्निकल हो गए रोगियों की सेवा करने वाले कर्मचारी हर तरह से वंचित हैं जो कि अन्यायपूर्ण है महानिदेशक महोदय से तीन बार समझौता होने के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आज तक पदोन्नति नही हुई है जबकि मुख्यमंत्री के सख्त आदेश होने के बाद भी आज तक पदोन्नति नही हो पाई है जो कि दुःखद और चिन्तनीय है संघ को आंदोलन जैसी स्थिति करने हेतु बाध्य किया जा रहा है।

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जिलाध्यक्ष गुरुप्रसाद गोदियाल जिला मंत्री त्रिभुवन पाल प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजेन्द्र तेश्वर जिला मंत्री हरिद्वार राकेश भँवर ने कहा कि नर्सेस संवर्ग को कई वर्षों से पोष्टिक आहार भत्ता मरीजो के संपर्क में रहने के कारण दिया जा रहा है जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मी वार्ड बॉय, वार्ड आया, सफाई सेवक, चोकीदार अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मी नर्सेस संवर्ग से ज्यादा मरीजों के संपर्क में रहते हैं किंतु उनको आज तक पोष्टिक आहार भत्ता नही दिया जाना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है जो भेदभाव की नीति को उजागर करता है और सबसे छोटे संवर्ग के साथ अन्याय पूर्ण रवैया है जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना कोरोना में अपनी सेवाएं दी उनको आज तक प्रोहत्साहन भत्ता नही मिला और समस्त उत्तराखंड के चिकित्सा अधिकारियों को 10 हजार प्रोहत्साहन भत्ता दिया जाना सरासर भेदभाव दर्शाता है जो कि किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जायेगा जल्द ही प्रदेश स्तर पर बैठक कर अग्रिम रणनीति बनाई जाएगी।

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