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चले गये ” मिठ्ठा छुयांल”| पुराने ढर्रे पर लौटे ” गौं-गुठ्यार “| जयमल चंद्रा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा, द्वारीखाल


चुनावी मौसम में गुल-ए-गुलदार हुये गौं-गुठ्यार अब पुराने ढर्रे पर लौट आये हैं। मिठ्ठा छुयांल मीठी-मीठी बात चले गये हैं। उनका काम इतना ही था। सो, अपना काम करके चले गये। टोपी पहने ये छुयांल जनता को टोपी पहनाकर गये हैं। यही तो होता आया है अपने उत्तराखंड में अब तक। जनता ने अपना फैसला दे दिया है। दस मार्च को पता चलेगा कि कौन कितने पानी में है।

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चुनावी बयाल में गौं-गुठ्यार में मिट्ठा छुयांलों की खासी भीड़ हुयी थी। रोज-रोज ये मिट्ठा छुयांल जनता को हाथ जोड़कर अपना हितैषी बताते रहे। वायदे भी हुये और कसमें भी खायी गयी। ये तो चुनावी बयाल में होना ही था। लेकिन इस चुनावी बयाल में गौं-गुठ्यार में खासी रौनक थी। ऐसा लगा कि अब ये बसंत लौट आयी है। लेकिन ये चार दिन की चांदनी थी, अंधेरी रात तो होनी ही थी।

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मतदान के बाद गौं-गुठ्यार पुराने ढर्रे पर लौट आये हैं। सबकुछ खाली-खाली है। ग्रामीण अपने कामों में लग गये हैं। द्वारीखाल क्षेत्र के हर्षमोहन, प्रदीप सिंह, जवाहर सिंह, दीपक सिंह, कपिल देव, मुकेश कुमार, आदि बताते हैं कि बसगाल थी यानि बरसात थी। बरसात आती है और जाती है। ये चुनावी बरसात भी चली गयी है। कल्जीखाल क्षेत्र के मनमोहन, भूपेंद्र, त्रिवेंद्र, अमरदीप आदि बताते हैं कि हर चुनाव में ऐसा ही होता है। नेताओं को चुनाव में गौं-गुठ्यार की याद आती है। नेतानगरी का हाल यही रहा तो वो दिन दूर नहीं जब गौं-गुठ्यार पूरी तरह से खाली हो जायेंगे। हे नेताओं तक खैला माछा।

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