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योग में आयी वैश्विक स्वास्थ्य जागरुकता| योगाचार्य डाॅ0 अनुपम कोठारी| पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस


वर्तमान में बदलते परिदृश्य से सम्पूर्ण विश्व स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। जैसा कि कहा भी गया है कि प्रथम सुख ‘निरोगी काया‘ परन्तु आज हम इस विषय से विमुख होते जा रहें हैं। जिसका मुख्य कारण, दैिनक जीवन में हमारी अनियंत्रित जीवन शैली, अकर्मण्यता, शारीरिक अभ्यास में कमी आदि। जिसके फलस्वरूप विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न हो रहें हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में रा ेगों की चिकित्सा के लिए निरन्तर नये-नये शोध किये जा रहें हैं जिससे सिर्फ तत्कालिक लाभ मिल रहें परन्तु दूरगामी परिणाम प्राप्त नही हो रहें हैं जो कि चिन्ता का विषय हैं। आज इसी कारण समुच्य विश्व योग को अपना रहा हैं। क्योंकि योग का प्रथम लक्ष्य ही अन ुशासन हैं आ ैर जीवन में अनुशासित होने मात्र स े ही शरीर स्वस्थ हा े जाता हैं। यद्यपि संक्षेप म ें कहें तो ‘‘अनुशासित जीवन शैली ही स्वस्थ का प्रथम सोपान है‘‘ं। योग आज समग्र स्वास्थ्य की परिकल्पना को सिद्ध कर रहा हैं क्योंकि योग, जीवन शैली हैं, योग जीवन जीने की कला है, व योग अन ुशासन है।

अतैव जीवन में योग रूपी प्राप्य विधा का े अपनाने से शारीरिक एवं मानसिक व्याधियाॅ दग्ध हो जाते हैं। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर योग का प्रचार प्रसार हो रहा हैं, परन्तु योग का प्रमुख केन्द्र भारत ही रहा हैं। साथ-साथ ही उत्तराखण्ड का भी विशेष योगदान रहा हैं। उत्तराखण्ड का सौम्य वातावरण, प्राकृतिक सौदर्यता दुर्लभ औषधियाॅ आदि के कारण इसे देवभूमि भी कहा जाता हैं। योग के प्रमाणिक ग्रन्थ घेरण्ड संहिता में महर्षि घेरण्ड मुनि ने योग साधना के लिए इसी प्रकार के स्थान का वर्णन किया हैं। जिसके कारण देवभूमि उत्तराखण्ड में अत्यधिक योग साधक आकर्षित हुए। जिनमें कि स्वामी विवेकानन्द, स्वामी शिवानन्द, आचार्य श्रीराम, आचार्य श्रीराम शर्मा, स्वामी चिन्मयानन्द, स्वामी वेदभारती, स्वामी सत्यानन्द सरस्वती आदि थे।

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देवभूमि आज से ही नही प्राचीन काल से ही योग के ज्ञान को आम जनमानस तक आश्रमों तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानो ं के माध्यम से पंहुचा रही हैं। कैलाश आश्रम, शिवानन्द आश्राम ऋषिकेश, योग निकेतन ऋषिकेश, वेद निकेतन ऋषिक ेश, ओंकारानन्द आश्रम ऋषिकेश, परमार्थ निकेतन ऋषिकेश, गायत्री योग पीठ हरिद्वार, पतं ंजलि योगपीठ हरद्विार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार, देवभूमि आज से ही नही प्राचीन काल से ही योग के ज्ञान को आम जनमानस तक आश्रमों तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानो ं के माध्यम से पंहुचा रही हैं।

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