कृपया ध्यान दें…पटाखों का धुआं: सांस के मरीजों के लिए खतरा, बरते ये जरूरी सावधानियां |Anil Sharma की Report

सिटी लाइव टुडे, अनिल शर्मा, लालढांग
पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं सांस के मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। पटाखों के जलने से हवा में बारीक धूल कण (पीएम 2.5 और पीएम 10), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें घुल जाती हैं।

ये प्रदूषक सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी और एलर्जी से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, सीने में जकड़न और दम घुटने जैसी शिकायत हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों से निकलने वाले सूक्ष्म कण फेफड़ों में सूजन और जलन पैदा कर सकते हैं। पहले से सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह स्थिति अस्थमा का दौरा पड़ने या बीमारी के लक्षण गंभीर होने का कारण बन सकती है। कई बार स्वस्थ लोगों को भी धुएं के संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसका असर केवल कुछ घंटों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि अधिक प्रदूषण के संपर्क में आने से लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं।

क्या करें
- अस्थमा और सीओपीडी के मरीज दीपावली पर पटाखों के धुएं से दूर रहें।
- घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें, विशेषकर जब बाहर धुआं अधिक हो।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार निर्धारित दवाएं और इनहेलर अपने पास रखें।
- जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क पहनें। हालांकि यह गैसों से पूरी सुरक्षा नहीं देता।
- सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत स्वच्छ हवा वाली जगह पर जाएं और चिकित्सकीय सहायता लें।
- घर में धुआं और धूल जमा न होने दें।
- बच्चे भी बड़ों की निगरानी में पटाखे जलाएं।
क्या न करें
- सांस के मरीज पटाखे जलाने या उनके आसपास खड़े होने से बचें।
- धुएं से भरे स्थान पर टहलने या व्यायाम करने न जाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें।
- सांस फूलने या सीने में जकड़न को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें।
