Satpuli News…पलायन के दौर में भी जीवंत है रामलीला की परंपरा, सतपुली में उमड़ रहे दर्शक |जगमोहन डांगी की Report

पौड़ी (जगमोहन डांगी): देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इन दिनों रामलीलाओं के मंचन का दौर जोरों पर है। हालांकि पलायन के कारण कई गांवों में यह परंपरा थम चुकी है, लेकिन नगरों और कस्बों में आज भी यह सांस्कृतिक विरासत पूरी शान से जीवंत है। नई पीढ़ी के युवा इस परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी क्रम में, नयार नदी के तट पर बसे सतपुली बाजार में नगर पंचायत के पुराने मैदान पर प्रसिद्ध रामलीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसे लेकर दर्शकों और युवाओं में भारी उत्साह है।


आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में भी बरकरार है क्रेज
आज के सूचना एवं प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के दौर में भी रामलीला के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। सतपुली में आयोजित इस रामलीला को बेहतर प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) और प्लेबैक ध्वनि जैसी आधुनिक तकनीकों से सजाया गया है, जिससे मंचन और अधिक आकर्षक बन गया है। यही वजह है कि रामलीला देखने के लिए हर रोज बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं।

प्रमुख किरदार और मंचन
रामलीला मंचन के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को सत्य, त्याग, धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का संदेश दिया जा रहा है।

इस आयोजन में प्रमुख किरदारों की भूमिका इस प्रकार है:
- भगवान श्रीराम: अरेंनंपाल
- लक्ष्मण: मोहित बिष्ट
- माता सीता: प्रीति कोली
- शूर्पणखा: संजय कुकरेती
- केवट: प्रेम सिंह रावत एवं गंगा सिंह बिष्ट
आयोजन में इनका रहा विशेष सहयोग
सतपुली रामलीला कमेटी इस आयोजन को सफल बनाने के साथ ही क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने में जुटी है। कमेटी के अध्यक्ष जगदंबा प्रसाद डंगवाल इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।


रामलीला का शुभारंभ सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा बौठियाल ने किया। इसके सफल संचालन में नगर पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र चौहान, रामलीला निर्देशक होशियार सिंह बिष्ट, अचलानंद डोबरियाल, मंच संचालक सत्यनारायण बेदी, और व्यापार मंडल अध्यक्ष सतपुली जयदीप नेगी सहित कई गणमान्य लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है।
