बुढ़ापे की कड़वी सच्चाई और मानसिक बदलावों का दर्पण ” एजिंग माइंड्स: नेविगेटिंग मेंटल हेल्थ इन लेटर लाइफ ” |Click कर पढ़िये पूरी News

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस
हरिद्वार। बढ़ती उम्र के साथ केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। इसी महत्वपूर्ण विषय को गहराई से रेखांकित करती नई पुस्तक ‘एजिंग माइंड्स: नेविगेटिंग मेंटल हेल्थ इन लेटर लाइफ’ का विमोचन हाल ही में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में किया गया।
Aging Minds: Navigating Mental Health in Later Life offers an interdisciplinary perspective on the psychological, emotional, cognitive, and social dimensions of aging. It highlights the importance of mental health and well-being in later life, addressing challenges such as depression, anxiety, dementia, grief, loneliness, and social isolation.
Key Highlights
Explores the psychological and emotional challenges associated with aging.
Emphasizes resilience, social connections, and holistic well-being.
Examines digital mental health support and contemporary approaches to care.
Highlights the roles of caregivers, communities, healthcare services, and public policy in promoting healthy aging.
Who Should Read This Book?
An insightful resource for students, researchers, psychologists, healthcare professionals, social workers, caregivers, and policymakers interested in aging and mental health.
Why Does It Matter?
As populations age, understanding and addressing mental health in later life is increasingly important. This book encourages a compassionate, holistic approach to aging that promotes dignity, psychological well-being, and quality of life.
Aging is more than a biological process—it is a psychological, emotional, and social journey that deserves understanding and care

करीब दो साल के कड़े परिश्रम और शोध के बाद गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अरूण कुमार और रिसर्च स्कॉलर महिमा पंवार ने इस पुस्तक का संपादन व लेखन किया है। इस महत्वाकांक्षी पुस्तक में देशभर के लगभग 47 नामी मनोचिकित्सकों और वैज्ञानिकों के अनुसंधानों और अनुभवों को शामिल किया गया है।

बुढ़ापे की कड़वी सच्चाई और मानसिक बदलावों का दर्पण
हर इंसान जानता है कि बुढ़ापा एक शाश्वत सत्य है। यद्यपि कोई बूढ़ा नहीं होना चाहता, लेकिन यह एक स्वाभाविक जैविक (Biological) प्रक्रिया है। बढ़ती उम्र में केवल शरीर ही कमजोर नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्थिति में भी भारी बदलाव आते हैं। यह पुस्तक इन्हीं परिस्थितियों और बुढ़ापे की मानसिक चुनौतियों का सटीक हाल बयां करती है।


दुनिया भर में बुजुर्गों की लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए यह पुस्तक जीवन के उत्तरार्ध में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करती है। इसमें अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety), डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), शोक, अकेलेपन और सामाजिक अलगाव जैसी गंभीर समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए हैं।
📌 पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
- गहन मानसिक विश्लेषण: वृद्धावस्था से जुड़े भावनात्मक उतार-चढ़ाव और मानसिक चुनौतियों को बारीकी से समझाया गया है।
- समग्र कल्याण (Holistic Well-being): केवल समस्याओं की चर्चा ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती (Resilience) और सामाजिक संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
- डिजिटल और आधुनिक देखभाल: पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य सहायता (Digital Mental Health Support) और आधुनिक तकनीकों के उपयोग का भी परीक्षण किया गया है।
- सामूहिक उत्तरदायित्व: स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए परिवार, देखभाल करने वालों (Caregivers), समाज, स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी नीतियों की भूमिका को रेखांकित किया गया है।
