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चुनाव की ” कड़वाहट ” में ” मिठास ” घोल गयी अबकी होली| जयमल चंद्रा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा, द्वारीखाल


वैसे तो होली का पर्व खास ही होता है लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही खास रहा। वजह, चुनाव के बाद आयी होली चुनाव की कड़वाहट में मिठास का रंग घोल गयी। गिले-शिकवे बिसराकर तन और मन होली के रंगों में रंगे और हुआ प्रेम का रंग और भी गाढ़ा।


चुनाव में रिश्तों में कड़वाहट तो आ ही जाती है। सियासी मौसम में चुनाव को लेकर गरमागरमी भी हो ही जाती है। ऐसा सभी जगह और हर बार होता है। ऐसे में यमकेश्वर सीट इससे अछूती कैसे रह सकती थी। यहां हल्की-फुल्की तकरार भी दिखी तो गरमागरमी भी थोड़ी-थोड़ी। मतभेद भी हुये हैं मनभेद होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। खास बात यह कि यह भेद पर्दे में ही रहे और लोकतांत्रिक ढंग से व्यवहार किया। यह अच्छी बात है। कहने का मतलब यह कि ना चाहते हुये भी चुनाव की कड़वाहट हो ही गयी थी।

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लेकिन ये कड़वाहट ज्यादा दिन नहीं रहने वाली थी। आखिर पहाड़ की आबोहवा में मिठास ही रहती है तो भला कड़वाहट कैसे ज्यादा दिन टिक सकती थी। सोने पर सुहागा यह कि चुनाव के ठीक बाद होली आयी। होली के रंगों ने सारी कड़वाहट को मिठास में बदल दिया। लोगों ने सारे गिले-शिकवे भुलाकर दिल खोलकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाया। केवल और केवल मिठास और प्रेम का रंग भी दिखा। सभी के चेहरों पर मिठास व प्रेम के कई भाव एक साथ तैर रहे थे। आखिर यूं गढ़वाली की वैभवशाली संस्कृति के चर्चे दूर-दूर नहीं होते है। एक बार फिर यह साबित हो गया है कि मतभेद और चाहे मनभेद हो जाये लेकिन ज्यादा दिन नहीं रहेंगे। हम एक हैं और एक ही रहेंगे।

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