” खुश चेहरों के पीछे के दर्द को पहचानें: कन्या गुरुकुल की अनूठी पहल, नुक्कड़ नाटक और थीम नृत्य से आत्महत्या रोकथाम की सीख |Click कर पढ़िये पूरी News

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हरिद्वार: अंधेरे से उजाले की ओर: जब कन्या गुरुकुल की बेटियों ने कला के जरिए दी जिंदगी की जंग जीतने की सीख
हर साल 10 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ के अवसर पर इस बार हरिद्वार में संवेदनशीलता और कला का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अक्सर जिस गंभीर विषय पर बात करने से समाज कतराता है, कन्या गुरुकुल, हरिद्वार के मनोविज्ञान विभाग ने होप इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के साथ मिलकर उस पर खुलकर संवाद की एक बेहतरीन शुरुआत की। यह सिर्फ एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन तमाम अनमोल जिंदगियों के नाम एक संदेश था जो भीतर ही भीतर घुट रही हैं। कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं और नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने मिलकर यह साबित कर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर यदि युवा पीढ़ी आगे आकर बात करे, तो समाज की सोच को एक नई दिशा दी जा सकती है।

पूरी और अच्छी खबर कुछ प्रकार से है ध्यान से पढ़िये और महत्वपूर्ण Tips को जीवन में उतारने का प्रयास भी कीजियेगा। आइये, आपको सीधे कन्या गुरूकुल ही लिये चलते हैं।विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर कन्या गुरुकुल, हरिद्वार के मनोविज्ञान विभाग ने होप इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के सहयोग से एक प्रेरणादायक और संवेदनशील जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। हर साल 10 सितंबर को मनाए जाने वाले इस महत्वपूर्ण दिवस का मुख्य उद्देश्य आत्महत्या जैसे गंभीर विषय पर समाज में चेतना जगाना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर संवाद करने के लिए प्रेरित करना है।

कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की करीब 30 छात्राओं, शिक्षिकाओं के साथ-साथ नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं और स्टाफ ने पूरी ऊर्जा के साथ हिस्सा लिया।

कला के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य का संदेश
इस अवसर पर मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक, थीम नृत्य, कविता और गायन के माध्यम से अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। नुक्कड़ नाटक के जरिए यह गहरा संदेश दिया गया कि कभी-कभी हंसते-मुस्कुराते और खुशहाल चेहरों के पीछे भी गहरे मानसिक द्वंद्व और आत्महत्या से जुड़े विचार चल रहे होते हैं। व्यक्ति तनाव, डिप्रेशन, अकेलेपन, निराशा या किसी गंभीर परेशानी से जूझते हुए भी बाहर से सामान्य नजर आ सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से यह बात जोर देकर समझाई गई कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते किसी के अनमोल जीवन को बचाया जा सके।

विशेषज्ञों के विचार और प्रेरणा
- डॉ. सुनीता रानी ने आत्महत्या से जुड़े सामाजिक डर और भ्रांतियों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत अवधारणाओं को मिटाने, अपनों का साथ निभाने और एक-दूसरे को जीने की उम्मीद बंधाने का संकल्प दिलाया। साथ ही, उन्होंने भारत सरकार द्वारा आत्महत्या रोकथाम के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी।
- डॉ. ऋचा सक्सेना ने चेतावनी दी कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक आने वाले बदलाव, उसका लगातार उदास रहना, लोगों से दूरी बनाना या निराशा की बातें करना बेहद गंभीर संकेत हैं। ऐसे समय में तुरंत पेशेवर (प्रोफेशनल) मदद तक पहुंचना और समय पर सहायता देना जीवन रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- होप इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के इंचार्ज डॉ. शशांक ने संदेश देते हुए कहा कि किसी की भी परेशानी को छोटा समझना या उसका मजाक उड़ाने के बजाय, उसे संवेदनशीलता से समझने और संबल देने की आवश्यकता है।
इस सार्थक और सफल आयोजन को मूर्त रूप देने में डॉ. पारूल मलिक, दीपा साहू और हरिराम जी का विशेष सहयोग रहा।
