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EEG…मस्तिष्क की भाषा और न्यूरोसाइंस की दुनिया. Psychology का Digital Face| साभार-Psychologist Dr मनोज कुमार चौहान

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-साभार-मनोज चौहान


मानसिक समस्याओं के समझने-समझाने व सुलझाने में कई प्रकार के मनोवैज्ञानिक परीक्षणों व साइको थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। मस्तिष्क की गतिविध या यूं कहें कि विद्युत गतिविधि को मापने में EEG का प्रयोग किया जाता है। आइये, इस खबर में ईईजी के बारे में भी विस्तार से उपयोगी जानकारी साझा करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो ईईजी मस्तिष्क की भाषा को समझने का टेस्ट है। दूसरे शब्दों में आप यह भी कह सकते हैं कि EEG मनोविज्ञान का डिजिटल चेहरा भी है। उपयोगी जानकारी साझा कर रहे हैं कि गुरूकुल कांगड़ी विवि के मनोविज्ञान विभाग के के असिस्टेंट प्रोफेसर डा मनोज कुमार चौहान |

डा मनोज कुमार चौहान बताते हैं कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Testing) और अनुसंधान में EEG (Electroencephalogram) एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण है। यह मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि (electrical activity) को मापने का एक गैर-आक्रामक (non-invasive) तरीका है।

. EEG क्या है? (What is EEG? हमारा मस्तिष्क कई न्यूरॉन्स (neurons) से बना है। जब ये न्यूरॉन्स एक-दूसरे के साथ संचार करते हैं, तो वे सूक्ष्म विद्युत संकेत (electrical impulses) पैदा करते हैं। EEG इन संकेतों को रिकॉर्ड करता है। यह मुख्य रूप से यह बताता है कि मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्से किस समय और कितनी तीव्रता से सक्रिय हैं।

An electroencephalogram (EEG) is a safe, painless test that measures and records the electrical activity of the brain using small metal discs (electrodes) attached to the scalp. It is primarily used to diagnose and monitor conditions such as epilepsy, seizure disorders, sleep disorders, brain tumors, injuries, and dementia

Key Aspects of EEG:

  • How it Works: Brain cells communicate via electrical impulses, which are picked up by electrodes and displayed as wavy lines on a screen.
  • Purpose: It aids in diagnosing epilepsy (the primary use), confirming brain death, evaluating sleep disorders, monitoring coma, and detecting brain damage from injuries or infections.
  • Procedure: During the 20- to 30-minute test, patients typically lie still on a bed. Technicians may use techniques like flashing lights or deep breathing to stimulate brain waves.
  • Preparation: Patients should wash their hair before the appointment, avoid hair products, and cut out caffeine 8–12 hours prior.
  • Risks: It is non-invasive and generally safe, with a very low risk of scalp irritation from the adhesive paste.

Common Uses:

  • Epilepsy and Seizures: Detecting specific wave abnormalities, such as sharp waves or spikes.
  • Sleep Studies (Polysomnography): Recording brain activity during sleep.
  • Neurological Evaluation: Assessing brain function in cases of confusion, dementia, or severe head injury

Conditions Evaluated:

  • Epilepsy and seizures
  • Brain tumors
  • Head injuries or infections (encephalitis)
  • Sleep disorders
  • Dementia
  • Stroke

यह कैसे काम करता है? (Mechanism)इलेक्ट्रोड (Electrodes): व्यक्ति के सिर (scalp) पर छोटे-छोटे धातु के डिस्क (इलेक्ट्रोड) लगाए जाते हैं।सिग्नल रिकॉर्डिंग: ये इलेक्ट्रोड मस्तिष्क की तरंगों को पकड़ते हैं और उन्हें एक मशीन (कंप्यूटर) तक भेजते हैं।ग्राफ: परिणाम एक लहरदार रेखाओं (wavy lines) के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्हें Brain Waves कहा जाता है।

मस्तिष्क की तरंगों के प्रकार (Types of Brain Waves)मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में इन तरंगों का विशेष महत्व है:Delta ($\delta$): सबसे धीमी तरंगें। ये गहरी नींद (deep sleep) के दौरान दिखाई देती हैं।Theta ($\theta$): उनींदापन, हल्की नींद या बहुत गहरे ध्यान (meditation) की स्थिति।Alpha ($\alpha$): जब व्यक्ति शांत और आराम की स्थिति में हो, लेकिन जाग रहा हो।Beta ($\beta$): सक्रिय सोच, समस्या समाधान और बाहरी दुनिया पर ध्यान केंद्रित करने के दौरान।

Gamma ($\gamma$): उच्च स्तरीय संज्ञानात्मक कार्य (cognitive tasks) और सूचना प्रसंस्करण।

मनोवैज्ञानिक परीक्षण में उपयोग (Uses in Psychology)मनोविज्ञान के क्षेत्र में EEG का उपयोग निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है:क. मानसिक विकारों का निदान (Diagnosing Disorders)ADHD: एकाग्रता की कमी वाले बच्चों में विशिष्ट ब्रेन वेव पैटर्न की पहचान करना। मिर्गी (Epilepsy): दौरे के समय मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि को समझना।नींद के विकार (Sleep Disorders): अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का विश्लेषण।ख. संज्ञानात्मक मनोविज्ञान (Cognitive Psychology)मनोवैज्ञानिक यह देखने के लिए EEG का उपयोग करते हैं कि मस्तिष्क किसी विशेष उत्तेजना (stimulus) पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। इसे ERP (Event-Related Potentials) कहा जाता है। उदाहरण के लिए:कोई शब्द सुनकर या चित्र देखकर मस्तिष्क कितनी जल्दी प्रतिक्रिया करता है।

भावनाओं का अध्ययन (Emotion Research)EEG से यह पता लगाया जा सकता है कि डर, खुशी या तनाव की स्थिति में मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा (जैसे बायां या दायां प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स) अधिक सक्रिय है।5. EEG के फायदे और सीमाएंफायदे (Advantages)सीमाएं (Limitations)समय की सटीकता (Temporal Resolution): यह मिलीसेकंड में बताता है कि मस्तिष्क कब सक्रिय हुआ।स्थान की सटीकता (Spatial Resolution): यह सटीक रूप से नहीं बता पाता कि गतिविधि मस्तिष्क के अंदर किस गहराई से आ रही है।सुरक्षित: इसमें कोई दर्द नहीं होता और न ही कोई रेडिएशन होता है।

निष्कर्ष मनोवैज्ञानिक परीक्षणों में EEG एक “खिड़की” की तरह काम करता है, जो हमें यह समझने में मदद करता है कि व्यवहार और भावनाओं के पीछे मस्तिष्क की भौतिक प्रक्रियाएं क्या हैं। हालांकि यह MRI की तरह मस्तिष्क की सुंदर तस्वीरें नहीं देता, लेकिन मस्तिष्क की “रफ़्तार” और “कार्यप्रणाली” समझने के लिए यह सबसे बेहतरीन टूल है।

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