खंडूरी, निशंक, बहुगुणा, त्रिवेंद्र, तीरथ न कर सके, धामी कर दें तो क्या बात|अजय रावत की Report

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सिटी लाइव टुडे, वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत, पौड़ी

पृथक राज्य आंदोलन की जननी नगरी पौड़ी उन शहरों में एक है जो उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा वीरान हुई है। राज्य गठन से पूर्व अविभाजित उप्र के दौर में पौड़ी मंडल मुख्यालय का रुतबा देखते ही बनता था, किन्तु पहाड़ी राज्य बनते ही इसका बेड़ा गर्क होने का सिलसिला शुरू हो गया।


अफसोस तब ज्यादा होता है कि जब इस शहर से जीवन का नाता रखने वाले खंडूरी, निशंक और बहुगुणा इस सूबे के मुखिया तक बन बैठे, वहीं इसी जिले से त्रिवेंद्र और तीरथ भी उस कुर्सी पर विराजमान रहे। किन्तु वह भी इस ऐतिहासिक नगरी का वैभव न लौटा पाए।

इधर लगता है सीएम गत 12 फरवरी को पौड़ी में मिले आतिथ्य से गदगद हो गए, जब से मौजूदा सीएम Pushkar Singh Dhami पौड़ी में रात्रि प्रवास करने के उपरांत वापस शीतकालीन राजधानी लौटे तो मंडल मुख्यालय पौड़ी के वैभव को लौटाने को लेकर लगातार अफसरों को निर्देशित कर रहे हैं। इस सिलसिले में आज भी उन्होंने तमाम आला अधिकारियों के साथ एक हाई लेबल की मीटिंग की है।

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उम्मीद है कि धामी के प्रयास पौड़ी की खोई रौनक को लौटा दें, ऐसा सम्भव हुआ तो पौड़ी की माटी से निकले तमाम पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए जवाब देना मुश्किल होगा।

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