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ना हारा है ना हारेगा| ” देबूभाई की संघर्षगाथा “| जयमल चंद्रा| कमल उनियाल की रिपोेर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा। कमल उनियाल की रिपोर्ट

कहते हैं कि बुलंद हौंसलों के आगे सारी कठिनाईयां छूमंतर हो जाती हैं। एक ही कर दिखाया है कि अपने देबू भाई। द्वारीखाल क्षेत्र के देबू भाई की संघर्षगाथा सलाम करने लायक है। सिटी लाइव यह खास रिपोेेर्ट देेेबूू भाई की संघर्षगाथा पर केंद्रित हैं। जनपद पौड़ी के विकास खंड द्वारीखाल के निकटवर्ती गाँव के देबू नेगी ने जो कि बचपन मैं ही दोनों पैर लकवा पेरालिसिस के शिकार हो गये। लेकिन पैंतीस वर्षीय देबू ने कभी विकलांगता के आगे हार नही मानी। देबू जमीन के सहारे हाथ पैर टेक कर चलने के बावजूद जंगल से गाय बकरी चुगा के लाता हैं। यही नहीं हाथ पैर अक्षम होने के बावजूद भी लकडी घास तथा घर के सारे काम करता है।


विपरीत हालत अभी सुधरने का नाम नहीं ले पा रहे थे कि देवू उनके जीवन में दुखों का पहाड़ भी टूटा। पहले भाई फिर मां तथा इस साल पिताजी की मृत्यु हो गयी। इस हालात में तो आम आदमी भी टूट जाता है। पर इस जिंदादिल इंसान ने हार नहीं मानी। दुनिया बिखरने के बाद अपना हाैंसला कायम रखा। अब देवू द्वारीखाल में राशन परचून की दुकान चला कर अपने तीन बच्चो की परवरिश तथा पढा रहे हैं। देबू नेगी ने कहा प्रतिभा के धनी को सरकार जनप्रतिनिधियो को मदद नहीं मिलती जिससे वे उपेक्षित है।

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