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प्रेम की बारिश करता एक गीत | झौल लगैगे पाणी मा | राकेश टम्टा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, राकेश टम्टा


युवा गायक आत्म प्रकाश बमोला का हालिया गीत झौल लगैगे पाणी मा सोसल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। यूं कहंे कि गीत दर्शकों को खूब भा रहा है। ओहो रेडियो पर भी यह गीत अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कर चुका है। इस गीत से पहले भी कई और गीतों को आत्म प्रकाश शब्दबद्ध भी कर चुके हैं और स्वरबद्ध भी। लेखन जितना मजबूत उससे खूबसूरत गायन का फन। लोक संगीत का स्पष्ट पुट व भाव उनके गीतों में साफ झलकता है।

हाल में A PLUS STUDIO से लाॅच किये एक गीत झौल लगैगे पाणी मा की बात ही कुछ अलग है। अलग कई मायनों में संगीत पक्ष से भी व गीत व स्वर के हिसाब से भी। देखा जाये तो यह गीत पूरी तरह से प्रेम की परिक्रमा करता हुआ नजर आता है। वेदना का अहसास भी दिखता है तो भरपूर रोमांच का भी अहसास कराता है यह गीत।

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शब्द चयन और भाव पक्ष को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। ठेठ लोक से जुड़े शब्दों का चयन गीत की खूबसूरती को और भी मजबूत कर देता है। संगीत की तान के साथ स्वरों का उतार-चढ़ाव भी इस गीत को और कर्णप्रिय बना देता है। संगीत पक्ष की बात करें तो कहा जा सकता है कि संगीत बेहद उम्दा और लीक से हटकर दिया गया है जो कि गीत को और भी रसीला कर देता है। इस गीत को संगीत दिया है रंजीत सिंह और अश्वजीत सिंह ने। बहरहाल, झौल लगैगे पाणी मा गीत को आप भी सुनियेगा।

गीत शीर्षक:- झौळ लगैगे पाणी मा
गीतकार, कम्पोजर, गायक :-
आत्म प्रकाश बमोला
संगीतकार:-
रणजीत सिंह, अश्वजीत सिंह

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जै दिन बिटि मैंन देखी तोई , हे निंद उड़िगे मेरी आँख्यूं मां ।
झौळ लगैगे पांणी मां , माछि सी तड़िफी ग्यों छालै मां ।।
जै दिन बिटि मैंन देखी तोई ।।
***
जुनक्याळी मुखुड़ी गुंदक्याळी गात स्या,आंखि तेरी शरमाणीन।
हिरणी सि हिटै मां चुलबुली छुंईं तेरि , मन मेरू भरमांणीन ।।
टपराणूं डांड़ा चकोर जनी , हे मन लग्युं गैंणा जून मां ।
झौळ लगैगे पांणी मां , माछि सी तड़िफी ग्यों छालै मां ।।
जै दिन बिटि मैंन देखी तोई ।।
****
घुंघर्याळी लटल्यूंमां झुमक्याळी कंदुड़ी, चौंठी कु तिल तेरू कौंणी सी ।
मौल्यार ऐगे तेरा हैंसण मां , ज्यू मेरू गौल़िगे नौंणी सी ।।
चौछ्वाड़ि दिखेंदि कुयेड़ी जनी, हे माटू सि छुल़े ग्यों गदन्यूं मा।
झौळ लगैगे पांणी मां , माछि सी तड़िफी ग्यों छालै मां ।।
जै दिन बिटि मैंन देखी तोई ।।
***
स्वांणु रंग रूप तेरु आंख्यूं मां बसिगे, मन माया लौ तू जगणी दे।
आस त्वै उंद मेरी सारा बैठ्यूं छौं, माया कि जोत न बुझणी दे।
माया ब्वटीं मेरी ज्यूड़ी जनी, तु गेड़ ना खोली खेल्यूं मां।।
झौळ लगैगे पांणी मां , माछि सी तड़िफी ग्यों छालै मां ।।
झौळ लगैगे पांणी मां , माछि सी तड़िफी ग्यों छालै मां ।।
जै दिन बिटि मैंन देखी तोई ।।

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