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कोटद्वार| नेगी के किले को भेदने को खंडूरी मैदान में| कमल बिष्ट की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, कमल बिष्ट
आखिरकार कोटद्वार सीट पर भी सियासी संग्राम की स्थिति साफ हो गयी है। पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की पुत्री रितु खंडूरी व पूर्व काबीना मंत्री सुरंेद्र सिंह नेगी आमने-सामने होंगे। इसके साथ ही कोटद्वार सीट पर भी मुकाबला रोचक हो गया है। पहले इस सीट पर भाजपा को कमजोर आंका जा रहा था। 2012 में कोटद्वार सीट पर पूर्व सीएम बीसी खंडूरी को हार का सामना करना पड़ा था। तब कांग्रेस से सुरेंद्र नेगी ने बीसी खंडूरी को शिकस्त दी थी। इस बार पुत्री की बारी है कि पिता की हार का बदला ले।

बीजेपी ने आज बड़े मंथन करने के बाद प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी है, जिसमे पौड़ी जिले कि सबसे महत्वपूर्ण सीट कोटद्वार से यमकेश्वर वर्तमान विधायक ऋतु खण्डूरी को उम्मीदवार बना दिया है। पौड़ी गढ़वाल से किसी भी ब्राह्मण चेहरे को टिकट नहीं मिलने से कही ना कही ब्राह्मणों में असंतोष पनप रहा था, जिसको डैमेज कंट्रोल कर ऋतु खण्डूरी को कोटद्वार से प्रत्याशी बनाया गया है।

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ऋतु खण्डूरी को यमकेश्वर से टिकट नहीं मिलने से महिला मोर्चा से लेकर उनके समर्थक नाराज थे, ऋतु खण्डूरी को टिकट नही दिए जाने से यह भी सवाल उठ रहे थे कि खण्डूरी परिवार अब बीजेपी के लिये जरूरी नही रह गया है, ऐसे में बीजेपी संगठन की काफी किरकिरी हो रही थी। इसके अलावा बीजेपी महिला प्रदेश अध्यक्ष का टिकट काटकर कोंग्रेस से बीजेपी में आई सरिता आर्या जो की काँग्रेस की महिला अध्यक्ष थी उनको बीजेपी ने टिकट दे दिया था, इससे भी महिलाओं में नाराजगी देखने को मिल रही थी।


अब बीजेपी संगठन ने ऋतु खण्डूरी को कोटद्वार से टिकट दे दिया है, इस बार ऋतु खण्डूरी के पास इस अभेद्य किले में सेंध मारकर पिताजी के हार का बदला चुकाने का सुनहरा अवसर है। कहते हैं इतिहास अपने आप को दोहराता है। तारीख और साल भले ही बदल गए हों, पर सामने वही सुरेन्द्र सिंह नेगी है जिन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी को 2012 विधानसभा चुनाव में शिकस्त दी थी। भुवन चंद खंडूरी तो सुरेंद्र सिंह नेगी का बनाया चक्रव्यूह नहीं भेद पाए थे पर रितु खंडूरी के पास मौका है इस बार इस चक्रव्यूह को भेदने कर अपने पिता की हार का बदला लेने का।

भाजपा ने रितु भूषण खंडूरी को उस दंगल से चुनाव मैदान में उतारा है जिसे साल 2012 में उनके पिता और भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी भी नहीं फतह कर पाए थे। वह भी उस समय जब देश में अन्ना आंदोलन चल रहा था और उत्तराखंड में “खंडूरी है जरूरी” का नारा बुलंद हो रखा था। कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेंद्र सिंह नेगी ने उस समय एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी भी नहीं भेद पाए।
उत्तराखंड बनने के बाद कोटद्वार अलग सीट बनी तो तब से यह चैंकाने वाले नतीजे ही देती आई है। 2002 में राज्य विधानसभा के पहले चुनाव में यह सीट भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी का नामांकन निरस्त होने के चलते चर्चा में रही थी।हालांकि, भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतरे पूर्व ब्लाक प्रमुख भुवनेश खरक्वाल के सिर पर हाथ रखा और पूरी ताकत झोंकी, मगर मतदाताओं ने जीत का सेहरा पहनाया कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह नेगी को। 2007 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से मुकाबले के लिए भाजपा ने एकदम नए चेहरे दुगड्डा के तत्कालीन ब्लाक प्रमुख शैलेंद्र सिंह रावत पर दांव खेला। इस चुनाव में नेगी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे, मगर परिणाम चैंकाने वाला था। कड़े मुकाबले में शैलेंद्र ने 900 मतों से जीत हासिल की और वे पहली मर्तबा विस में पहुंचे।


सबसे चैंकाने वाला परिणाम 2012 का रहा। ‘खण्डूरी है जरूरी’ के नारे साथ मैदान में उतरी भाजपा ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी को यहां से प्रत्याशी बनाया। हालांकि, तब भाजपा को भितरघात समेत अन्य कारणों से भी जूझना पड़ा, लेकिन माना जा रहा था कि सिटिंग सीएम जीत हासिल कर लेंगे।नतीजा, आया तो न सिर्फ खंडूड़ी बल्कि पार्टीजन भी भौचक रह गए। खंडूड़ी को न सिर्फ हार झेलनी पड़ी, बल्कि इसी एक सीट को गंवाने से भाजपा सत्ता के करीब पहुंचकर भी विपक्ष में बैठने को मजबूर रही।

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कोटद्वार सीट से यमकेश्वर की वर्तमान विधायक ऋतु खण्डूरी को बीजेपी ने टिकट दिया है, वही 2007 से 2012 में कोटद्वार से बीजेपी के विधायक रहे शैलेन्द्र रावत जो कि 2017 में ऋतु खण्डूरी के विपक्षी खेमे कोंग्रेस से यमकेश्वर से चुनावी मैदान में खड़े थे, वह आज भी उसी सीट पर लड़ रहे हैं, जबकि ऋतु खण्डूरी को उनकी गृह सीट पर प्रत्याशी बना दिया गया है। ऋतु खण्डूरी के लिये भाभर क्षेत्र से यमकेश्वर के समर्थकों के मतों का अच्छा खासा समर्थन मिल सकता है। क्योकि कोटद्वार सीट को निकालने में भाबर के मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

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