चुनाव मेले की तरह निपट जाते हैं, “खेल खत्म, पैसा हज़म”|साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत ..

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

2012 में जनपद पौड़ी के 3 विधान सभा क्षेत्र धुमाकोट, थलीसैण और बीरोंखाल का विलोपन कर चौबट्टाखाल नाम से एक नए नाम की विस् बनाई गई। चौबट्टाखाल नाम से पहली बार इस क्षेत्र में विस् का चुनाव होना था। मैं और अग्रज एपी घायल एक दैनिक समाचार पत्र के लिए यहां से चुनावी समाचार संकलन कर रहे थे। क्षेत्र की अहम समस्याओं और मुद्दों को लेकर न केवल प्रत्याशियों बल्कि आम मतदाता से भी गहन संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था।


आज दस वर्ष बीत चुके हैं, एक बार कांग्रेस और एक मर्तबा भाजपा की सरकार अपना रोल खेलकर विदा भी हो चुकी हैं, लेकिन 90 फीसद समस्याएं और मुद्दे उसी मोड़ पर खड़ी हैं। यह सिर्फ एक चौबट्टाखाल विस् की स्थिति नहीं, कमोवेश पहाड़ के हर विधानसभा क्षेत्र की यही तस्वीर है। स्याह हकीकत यह है कि आम मतदाता ही अपने व क्षेत्र के सरोकारों के प्रति गंभीर नहीं है,

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चुनावी प्रचार के दौर में भले गंभीरता से इन मसलों पर चर्चा होती हो लेकिन चुनाव निपटने के बाद विजयी प्रत्याशी तो दूर आम वोटर भी स्वयं के निजी हितों तक सीमित हो जाता है, नतीजतन बंचित व उपेक्षित क्षेत्रों की तस्वीर सुधरने के बजाय निरंतर और बदरंग होने लगती है।
देखा जाए तो चुनाव एक मेले या उत्सव की तरह निपट जाते हैं, “खेल खत्म, पैसा हज़म” ..

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