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खुस फुस|पौड़ी और यमकेश्वर को लेकर कांग्रेस के दो धुर विरोधी क्षत्रप के बीच जुगलबंदी|साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस, साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

पौड़ी जैसे जिले, जहां से कभी इस सूबे की सियासत की दिशा और दशा तय होती थी, वहां मोहरे बिठाने के लिए आज देहरादून और अल्मोड़ा के आका चाल चलने लगे हैं।


अंदर की खबरों पर यकीन करें तो पौड़ी सुरक्षित और यमकेश्वर में पार्टी प्रत्याशी चयन को लेकर हरदा के जानेमाने प्रतिद्वंदी और हरदा के ही रहमोकरम से बड़े नेता बने अल्मोड़ा के एक तथाकथित ‘गांधी टाइप’ नेता के बीच जुगलबंदी या यूं कहिये सौदेबाजी हो रही है, जबकि एक जमाने में इन नेताद्वय के मध्य 36 का आंकड़ा हुआ करता था।

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माना जा रहा है कि हरदा के दलित मुख्यमंत्री बनाये जाने के बयान के बाद कुमाऊं के इन बड़े नेताजी को संभावित कष्ट होने लगा है, उन्हें शायद हरदा के बयान में अपने ही जिले के एक सौम्य व धीर गंभीर दलित नेताजी की संभावनाओं की आहट नज़र आ रही है। अहम ये कि पौड़ी सुरक्षित में गैर जिले का प्यादा बिठाने को लेकर दोनों एक सुर किये हुए हैं । हरदा के यह सियासी चेला पौड़ी में अपना प्यादा बिठाने की खातिर यमकेश्वर में हरदा को आइना दिखाने को बेताब क्षत्रपों से सौदेबाजी तक को आतुर है।

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भले ही सूबे में हालिया हवाओं का रुख कांग्रेस की संभावनाओं के अनुकूल है जिसके चलते अति आत्मविश्वास से लबरेज़ बड़े क्षत्रप विधायकों के चुनाव से पहले सीएम की लड़ाई में व्यस्त हो चुके हैं। कहीं यह कहावत चरितार्थ न हो जाये कि “सूत न कपास और जुलाहों में लट्ठम लट्ठ”

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