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पंजे, कमल के साथ ये भी करेंगे वोट का दोहन, श्रीनगर से मोहन तो चौबट्टाखाल से दिगमोहन|साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

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सिटी लाइव टुडे-साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

कोई कुछ भी कहे, लेकिन फिलहाल पहाड़ के मतदाता भाजपा व कांग्रेस के मोहपाश से मुक्त होते हुए नज़र नहीं आ रहे हैं। अलबत्ता कुछ सीटों पर अन्य दलों के प्रत्याशी अपनी व्यक्तिगत छवि और संसाधनों के बलबूते चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता अवश्य रखते हैं। पौड़ी जिले में फ़िलवक्त श्रीनगर से उक्रांद के मोहन काला और चौबट्टाखाल से आप के दिग्मोहन नेगी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।


दिग्मोहन नेगी आप के युवा ब्रिगेड के प्रांतीय मुखिया हैं, लेकिन उनकी चुनावी संभावनाएं आप पार्टी की बुनियाद से नहीं बल्कि उनके क्षेत्र में एक दशक तक लगातार सक्रिय रहने से है। सतपुली के चमोली सैण में हंस अस्पताल की स्थापना में उनकी भूमिका सबसे अहम रही है साथ ही वह क्षेत्र में लगातार सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शिद्दत से प्रतिभाग करते रहे हैं। युवाओं के साथ मातृशक्ति में उनके प्रति स्नेह देखा जा सकता है। देखना होगा कि वह आगामी चुनाव में किस आंकड़े को छूने में कामियाब हो सकते हैं। लेकिन इतना निर्विवाद रूप से कहा जा सकता है कि दिग्मोहन सत्ता विरोधी वोट के साथ दोनों पार्टियों के हिस्से के वोटर पर सेंध मारेंगे, जिससे अधिक नुकसान कांग्रेस का होना संभव है।

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वहीं श्रीनगर में 2017 में साढ़े चार हज़ार से अधिक मतदाताओं का विश्वास हासिल करने वाले मोहन काला भी सोशल मीडिया के साथ जमीनी स्तर पर भी काफी सक्रिय नज़र आ रहे हैं। इस मर्तबा उक्रांद जैसे दल के टिकट पर वह स्वाभाविक तौर पर पहाड़ के सरोकारों को केंद्रित कर अपना चुनाव अभियान चलाएंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार वह अपने पिछले आंकड़े में कितना इज़ाफ़ा करते हैं या फिर उसमें कमी आती है। बहरहाल, इतना तय है कि काला की बढ़त इस सीट पर परिणाम को निश्चित रूप से प्रभावित करेगी, और मोहन काला भी भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस को अधिक नुकसान पंहुचाएँगे।

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वहीं पौड़ी सुरक्षित सीट पर मनोहर लाल पहाड़ी भले ही पिछली बार भी निर्दलीय प्रत्याशी रहे हैं लेकिन शुरू में काफी सक्रिय दिखाई दे रहे पहाड़ी बीते 6 महीने से लगभग सियासी परिदृश्य से ओझल हैं ऐसे मेँ शायद उनका आप के टिकट पर चुनाव में उतरना फिलहाल एक औपचारिकता मात्र नज़र आ रहा है।

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