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पुस्तक समीक्षा | दिल की पीड़ा और मन के मीत| ” शब्दों का गीत”| समीक्षक- जीतेन्द्र जायसवाल (प्रवक्ता रामलो विवि ) |पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे,जीतेन्द्र जायसवाल (प्रवक्ता रामलो विवि )

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इन दिनों मैंने एक नई पुस्तक पढ़ी जिसका नाम है “शब्दों का गीत”। यह पुस्तक चन्दन प्रताप सिंह जी का प्रथम संस्करण है। लेकिन साहित्य की सेवा में वे वर्षों से रत हैं। यह उनकी रचनाओं की परिपक्वता में स्पष्ट झलकता है। पुस्तक के बारे में कुछ कहने से पहले मैं चन्दन प्रताप सिंह जी के बारे में कहना चाहूँगा।

चन्दन जी का जीवन संघर्षो से भरा हुआ है। इन्होंने अपनी दिब्यांगता को कभी भी खुद पर हावी नहीं होने दिया। सामान्य लोगों को इनसे मेहनत और हिम्मत सीखनी चाहिए। इन्होंने कई स्तरों पर कई सारे पुरस्कार भी प्राप्त किया और मैराथन में भाग लेकर यह बता दिया कि ‘हिम्मते मर्दा मददे ख़ुदा’। चन्दन जी अत्यंत हंसमुख और मजाकिया स्वभाव के व्यक्ति हैं। पहली मुलाकात में मुझे लगा मानों यह एक घमण्डी स्वभाव के हैं लेकिन इनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल एवं उच्च विचारों वाला है।

इनके व्यक्तित्व की सारी झलक इनकी कविताओं में दिखती है। इनके हृदय की कोमलता इनकी लिखी “कुत्ते का क्रन्दन” और “भिखमंगा” जैसी रचनाओं से स्पष्ट होता है। इनका प्रेम और दुख “नगमा”, “किस्मत का अंधेरा” और “ढलती सुबह” जैसी कविताओं से झलकता है।
इनकी राष्ट्रभक्ति इनकी रचना में बड़े ही निराले तरीके से “ऐ देश के लोगों” और “मैं और मेरा गधा” ,जो नेताओं और सिस्टम पर कटाक्ष है, में साफ-साफ दिखाई देता है।

इन्होंने कवि के बारे में बतलाते हुए कवि के हालात को स्पष्ट किया है। जिसमें शब्दों का चयन और स्पष्टीकरण काफी दिलचस्प है। इनका मजाकिया स्वभाव इनकी कविताओं से भी झलकता है जहां इन्होंने साफ-साफ लिखा है कि “मैं कवि नहीं हूँ” और अपने आप को सौदागर कहते हुए इन्होंने छात्रों और शिक्षकों के हालात को जिस तरह स्पष्ट किया है वह काबिले तारीफ के लायक है।

चन्दन जी कि कविताएं सकारात्मकता, सृजनात्मकता, आशावादिता, पुरूषार्थ और कर्म की प्रधानता से रू-ब-रू कराते हैं।
इन्होंने सत्य की निर्ममता को सुन्दरता, आशा और विश्वास के गमले में बड़ी ही चतुराई से बोया है।

चन्दन प्रताप सिंह जी ने न सिर्फ इंसान की लालच और द्वेष पर कटाक्ष किया है बल्कि खुद के ऊपर भी “चन्दन” शिर्षक में अत्यंत कड़े शब्दों में व्यंग्य की बौछार की है। इनकी यही बात मेरी निगाहों में इन्हें कई नये कवियों और लेखकों से ऊपर स्थान दिलाती है।

चन्दन जी वास्तविक जीवन में तो काफी शांत दिखते हैं किन्तु इनकी कविताओं के हर एक पंक्ति में भावों और विचारों का समावेश मुखर होकर चित्कार करता है।

मुझे इनकी कई सारी रचनायें काफी पसंद आईं। अगर मैं मुख्य रूप से कुछ का जिक्र करू तो “भारतीय किसान की कहानी”, “राह में थककर ना रुक जाना”, “मैं एक लेखक”, “क्षितिज के पार” जैसी कविताए दिल को छू गईं।
चन्दन प्रताप सिंह जी की किताब अत्यंत सराहनीय है और हिन्दी के पाठकों और साहित्य प्रेमियों को यह किताब अवश्य पढ़नी चाहिए।

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किताब का नाम- शब्दों का गीत
कवि का नाम- चन्दन प्रताप सिंह
प्रकाशक- नोशन प्रेस
मूल्य- 150 मात्र

One thought on “पुस्तक समीक्षा | दिल की पीड़ा और मन के मीत| ” शब्दों का गीत”| समीक्षक- जीतेन्द्र जायसवाल (प्रवक्ता रामलो विवि ) |पढ़िये पूरी खबर

  • October 25, 2021 at 8:03 am
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    बहुत बहुत धन्यवाद।

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