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यहां भी खतरे की घंटी बजा रहा ” बीमार ” पुल |लेकिन सुनेगा कौन | नरेश सैनी की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, नरेश सैनी, गैंडीखाता ं


बरसाती सीजन में बारिश खतरे की घंटी बजा रही है। ऋषिकेश-देहरादून हाईवे पर सालों पुराना पुल ध्वस्त होकर बोल गया। मामले की जांच की बात कही जा रही है यह ठीक भी है लेकिन यह भी जरूरी है कि ऐसे और पुलों पर भी नजर-ए-इनायत हों जो खतरे की घंटी बजा रहे हैं। गैंडीखाता क्षेत्र में खस्ताहाल एक ऐसा ही पुल है जो खतरे की घंटी बजा रहा है। इस घंटी की आवाज नागरिक तो सुन रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नही रेंग रही है।

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अब जरा इस बीमार पुल के बारे में विस्तार से बताते हैं। दरअसल, यह पुल पूर्वी गंगा नहर पर बना है। यह पुल कई गांव को जोड़ता है। एक मोटे अनुमान के अनुसार लगभग 6000 की आबादी इसी पुल पर आवागमन के लिए निर्भर है परंतु पुल की हालत खस्ताहाल है।इसी पुल से टैªक्टर या छोटे निजी वाहनों की भी आवाजाही होती है।

यह बात भी किसी से छिपी हुयी नहीं है कि खनन के वक्त इसी पुल से खनन सामग्री से लदे वाहनों की आवाजाही बड़े पैमाने पर होती है। अफसोसजनक पहलू यह है कि इस बीमार पुल का उपचार करने को कोई तैयार ही नहीं है। ग्रामीण वक्त-बेवक्त पुल की मरम्मत की मांग करते रहे हैं लेकिन हुआ कुछ भी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि भरोेसे की मीठी गोली जरूर मिलती रही है। नतीजतन, भगवान न करें कि यह बीमार पुल किसी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

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नौरंगाबाद के विजेंद्र सिंह सैनी का कहना है कि अगर पुल की मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में नौरंगाबाद गुर्जर बस्ती चांदपुर आदि गांव का संपर्क गैंडीखाता से टूट जाएगा। गांव में जाने के लिए चार-पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। ग्रामीण सत्येंद्र चैाधरी, बाबू कसाना, नूर बढ़ाना, प्रशांत सैनी आदि ने बताया कि पुल खस्ताहाल है जिसकी मरम्मत बेहद जरूरी है लेकिन मरम्मत नहीं की जा रही है।

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