भोले भंडारी और सावन | सकल मनोरथ होंगे सिद्ध | पढ़िये पूरी खबर

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मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम् । तस्यावयवभूतैस्तु वयाप्तं सर्वमिदं जगत् ।।

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-प्रस्तुति- ज्योतिषाचार्य- डा विपुल देव, गोल्ड मेडलिस्ट9897105622 & 8279719053


भगवान भोलेनाथ की उपासना और आराधना को समर्पित सावन माह शुरू होने जा रहा है। 25 जुलाई को श्रवण नक्षत्र में सावन माह शुरू हो रहा है। कहते हैं कि सावन माह भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। सावन माह में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से आराधना करते हैं भगवान भोलेनाथ इसकी हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। सावन माह में कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी गयी है। लेकिन कुछ खास विधि से भक्त शिव शंकर की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। अमुक तीर्थ स्थल का नाम स्मरण कर गंगा मैया का ध्यान कर पुण्य हासिल किया जा सकता है। पेश है सिटी लाइव टुडे मीडिया हाउस की ये खास रिपोर्ट।

ज्योतिषाचार्य डा विपुल देव गोलड मेडलिस्ट ने बताया कि लिंगाभिषेक करें और पंच क्लशों से मुक्ति हेतु 5 बिल्व चढ़ायें। ओम शिव शंकर गंगाधर, शिव शंकर गंगाधर, शिव शंकर गंगाधर का ध्यान करें। इस मंत्र के प्रभाव से जो भक्त तीर्थों से कांवड़ से गंगाजल नहींे ला सके उनको पूरा पुण्य मिलेगा।

मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम् । तस्यावयवभूतैस्तु वयाप्तं सर्वमिदं जगत् ।।..

विशेष कामनाओं हेतु रूद्राभिषेक कार्य, विशेष द्रव्य
धन लाभ- मधु यानि शहद से
सर्वत्र जय, मान एवं श्री प्राप्ति हेतु-गन्ने के रस से
पशुधन प्राप्ति हेतु- दही से
सुखकारक वर्षा योग हेतु- जल से
व्याधि नाश एवं उत्तम स्वास्थ्य हेतु- गिलोय के रस से
संतान प्राप्ति हेतु- गौ-दुग्ध से
ज्वर शांति हेतु- शीतल जल धारा से
वंश विस्तार हेतु- गौ-धृत यानि घी से
शूगर रोग से मुक्ति हेतु- मधु एवं दुग्ध से
श्रेष्ठ बुद्धि प्राप्ति हेतु- शर्करा एवं दुग्ध से
पाप क्षय एवं व्याधि नाश हेतु- मधु एवं धृत से
कालसर्प योग निवारण हेतु- सावन माह की कृष्ण पक्ष की पंचमी और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को शिवलिंग पर जल चढ़ायंे। इसके अलावा शिवालयों में कृत्रिम चांदी के सर्प का जोड़ा चढ़ायें और सच्चे मन से भोलेनाथ की आराधना करें।

मायां तु प्रकृतिं विद्यान्मायिनं तु महेश्वरम् । तस्यावयवभूतैस्तु वयाप्तं सर्वमिदं जगत् ।।..

ज्योतिषाचार्य- डा विपुल देव, गोल्ड मेडलिस्ट

रूद्राभिषेक हेतु तिथियां
25 जुलाई- प्रातः 6 बजे से पहले।
27, 28, 31 जुलाई और 4, 5, 10, 13, 14, 19 व 20 अगस्त- पूरे दिनभर ।

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श्रावण शिव रात्रि व्रत एवं जलाभिषेक मुहूर्त
6 अगस्त-2021-शुक्रवार-प्रातः 6ः30 बजे से 8ः30 बजे तक
सायं- 7 बजे से 9ः50 बजे तक
नोट-य़द्यपि 6 अगस्त को प्रातः 6ः35 बजे से 7 अगस्त के सूर्याेदय तक सर्वार्थ सिद्व योग रहेगा। इसलिये 6 अगस्त को संपूर्ण दिन जलाभिषेेक, रूद्राभिषेक, आदि किया जा सकता है।

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