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” बात सेहत की ” गर्भाशय की रसोली (फाइब्रॉइड) से घबराएं नहीं, समय पर सतर्कता और आयुर्वेद से संभव है बचाव व उपचार: डॉ. वीनू जे बहल|Click कर पढ़िये पूरी News

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हरिद्वार / सिटी लाइव टुडे:
महिलाओं में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में गर्भाशय की रसोली (Uterine Fibroids) एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। इस विषय पर विशेषज्ञ प्रकाश डालते हुए जानी-मानी चिकित्सक डॉ.वीनू जे बहल ने बताया कि महिलाओं में प्रजनन की आयु के दौरान गर्भाशय में होने वाली गैर-कैंसरयुक्त (Benign) गांठें या रसोली आज के समय में चिंता का विषय बनती जा रही हैं, लेकिन सही समय पर पहचान और उचित जीवनशैली अपनाकर इस पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में इसका पक्का इलाज भी संभव है।

रसोली के प्रमुख कारण और लक्षण
डॉ.वीनू जे बहल के अनुसार, शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन, कफ और वात दोष का बिगड़ना तथा जीवनशैली में अशुद्धियों का संचय इस समस्या का मुख्य कारण बनता है। इसके प्रमुख लक्षणों में:

पीरियड्स के दौरान अत्यधिक और लंबे समय तक ब्लीडिंग होना।

पेट के निचले हिस्से और पेल्विक क्षेत्र में लगातार भारीपन व दर्द रहना।

बार-बार पेशाब आना या कब्ज की शिकायत होना।

कुछ मामलों में गर्भधारण में कठिनाई (बांझपन) का सामना करना पड़ना।

आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से प्रभावी समाधान
डॉ. बहल ने जोर देकर कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आयुर्वेद में रसोली के उपचार के लिए अत्यंत प्रभावी और प्राकृतिक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। आयुर्वेद में इसे ‘ग्रंथि’ या ‘अर्बुद’ माना गया है, जिसके उपचार के लिए मूल कारणों पर काम किया जाता है:

शोधन और पंचकर्म चिकित्सा: विरेचन और विशेष रूप से ‘बस्ती’ एवं ‘उत्तर बस्ती’ जैसी प्रक्रियाएं गर्भाशय के विकारों को दूर करने और दोषों को संतुलित करने में अचूक मानी जाती हैं।

चिकित्सा (औषधियाँ): कंचनार गुग्गुलू, वृद्धिकालीन गुग्गुलू और चंद्रप्रभा वटी जैसी आयुर्वेदिक औषधियाँ गांठों को अंदर से गलाने और सूजन कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा अशोकरिष्ट और दशमूलारिष्ट हॉर्मोनल संतुलन को सुधारते हैं।

संतुलित आहार और योग: मैदा, जंक फूड और रिफाइंड शुगर से परहेज करते हुए ताज़ा, सुपाच्य भोजन लें। साथ ही नियमित योग, प्राणायाम (कपालभाति, अनुलोम-विलोम) और आसन करने से पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है।

एक नजर इधर भी

रसौलियों के उपचार में माहिर हैं डॉ. वीनू जे बहल, मर्म चिकित्सा में भी दक्षता

हरिद्वार, उत्तराखंड। विनायक क्लिनिक, हरिद्वार में कार्यरत डॉ. वीनू जे बहल आयुर्वेदिक चिकित्सा, स्त्री रोग संबंधी परामर्श और मार्म चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही हैं। विभिन्न प्रकार की रसौलियों से संबंधित मामलों में उनके उपचार कार्य और स्वयं विकसित आयुर्वेदिक औषधीय फॉर्मूलेशन को लेकर उनकी विशेष पहचान सामने आई है।

डॉ. वीनू जे बहल के अनुसार, वे अपनी विशिष्ट आयुर्वेदिक औषधीय पद्धति के माध्यम से रसौलियों से संबंधित मरीजों का उपचार करती हैं। उनके अनुसार, कई मरीजों ने उपचार के दौरान सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं, जिनमें कुछ मरीजों ने बिना सर्जरी उपचार प्राप्त करने के अनुभव भी बताए हैं।

वर्ष 2022 में मिला International Icon Award

डॉ. वीनू जे बहल को वर्ष 2022 में International Icon Award से सम्मानित किया गया था। वे इस उपलब्धि को अपने चिकित्सा कार्यों और मरीजों की सेवा से जुड़ी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं।

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विनायक क्लिनिक, हरिद्वार में उपलब्ध हैं सेवाएँ

विनायक क्लिनिक, भारत गैस एजेंसी के निकट, सिंहद्वार, कनखल रोड, हरिद्वार, उत्तराखंड में डॉ. वीनू जे. बहल आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं मर्म चिकित्सा के माध्यम से मरीजों को सेवाएँ प्रदान करती हैं। उनका उद्देश्य रसौलियों और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मरीजों को उचित चिकित्सकीय परामर्श के लिए प्रोत्साहित करना है।

रसौली का प्रकार, उसका स्थान, आकार और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति उपचार के चयन में महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए किसी भी उपचार को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।

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डॉ.वीनू जे बहल ने महिलाओं को सलाह दी है कि यदि ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो घबराने के बजाय तुरंत किसी योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लें और समय रहते उचित उपचार शुरू करें।

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