Aiims : साइलेंट किलर ‘ शुगर-बीपी-कोलेस्ट्रॉल’ पर समय रहते कसें लगाम, विशेषज्ञों ने दी सलाह|Click कर पढ़िये पूरी News

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस
ऋषिकेश: एम्स ऋषिकेश में कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) के तीन दिवसीय वार्षिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। सम्मेलन के अंतिम दिन देश भर से आए चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाकर मधुमेह और हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है। इस दौरान चिकित्सकों ने मोटापे की देखभाल और डायबिटीज से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी गहन मंथन किया।

तीन सत्रों में हुए महत्वपूर्ण विषयों पर शोध और विचार-विमर्श
सम्मेलन के अंतिम दिन शोध प्रस्तुतियों के बाद तीन मुख्य सत्र आयोजित किए गए:
- पहला सत्र (क्रिटिकल केयर): विभिन्न मेडिकल कॉलेजों से पहुंचे चिकित्सकों ने वेंटिलेटर सपोर्ट हटाने में आने वाली कठिनाइयों, गंभीर फंगल संक्रमण की समय रहते पहचान, सेप्सिस और एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीवाणुओं (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। इसे समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बताया गया।
- दूसरा सत्र (हृदय और गुर्दे का संबंध): चिकित्सकों ने अपने आपसी अनुभव साझा करते हुए हृदय व गुर्दे के गहरे आपसी संबंध, हृदय विफलता के उपचार और प्रत्यारोपण वाले मधुमेह रोगियों की विशेष देखभाल पर चर्चा की।
- तीसरा सत्र (मोटापा और नई पीढ़ी की दवाएं): यह सत्र मोटापे को एक दीर्घकालिक रोग के रूप में समझने और इसके इलाज में उपयोग होने वाली आधुनिक दवाओं पर केंद्रित रहा।

डायबिटीज ग्लोबल हेल्थ के लिए एक बड़ी चुनौती: प्रो. रविकांत
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स ऋषिकेश के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने कहा कि डायबिटीज आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य के लिए एक विकराल चुनौती बन चुकी है। यह सीधे तौर पर या अंगों के फेल होने जैसी स्थितियों के माध्यम से शरीर को भारी नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज का संबंध कई प्रकार के कैंसर से भी जुड़ा है और यह किसी भी अन्य बीमारी के असर को भी प्रभावित कर सकती है।

शोध और क्विज प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
सम्मेलन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित किया गया:

- शोध पत्र व पोस्टर प्रस्तुति विजेता: डॉ. तहजीन, डॉ. सिद्धांत, डॉ. अभिजीत, डॉ. कोमल, डॉ. गगन, डॉ. संगप्पा, डॉ. परिधि और डॉ. खुशबू।
- पीजी क्विज विजेता: डॉ. गगन दलाल और डॉ. देवांग अग्रवाल की टीम।
- पीजी क्विज उपविजेता: डॉ. प्रदीप राउत और डॉ. गगन हरनाथ।
इस दौरान मेडिसिन विभाग के डॉ. वेंकटेश पाई, डॉ. मुकेश बैरवा, डॉ. पी.के. पांडा, डॉ. दरब सिंह और डॉ. अखिलेश कुमार समेत कई फैकल्टी सदस्य मौजूद रहे।
इंसेट: सत्र के प्रमुख वक्ता और उनके विचार
- गहन चिकित्सा सत्र: डॉ. अर्नब चौधरी, डॉ. विनय पंडित, डॉ. सुलेखा सक्सेना, डॉ. सीमा महंत और डॉ. एल.एच. घोटेकर ने अपने व्याख्यान दिए।
- हृदय, किडनी और मेटाबॉलिज्म सत्र:
- डॉ. ज्योति प्रकाश: जोखिम वाले मरीजों के लिए एंटीमाइक्रोबियल दवाएं चुनते समय किडनी सुरक्षा पर जोर दिया।
- डॉ. साबू ऑगस्टीन: हृदय-किडनी-मेटाबॉलिक (सीकेएम) सिंड्रोम पर चर्चा करते हुए भारतीय मरीजों के लिए जोखिम और देखभाल को नए सिरे से परिभाषित करने की बात कही।
- डॉ. डी.एम. भौमिक: किडनी प्रत्यारोपण करा चुके मधुमेह रोगियों में तीव्र रिजेक्शन के प्रबंधन को समझाया।
- इंसुलिन और बुजुर्गों की देखभाल: “क्या रोजाना ली जाने वाली बेसल इंसुलिन अप्रचलित हो रही है?” विषय पर डॉ. रणविजय सिंह (पक्ष में) और डॉ. अमनदीप कौर (विपक्ष में) ने तर्क रखे। डॉ. अनिरुद्ध मुखर्जी ने बुजुर्गों में शुगर नियंत्रण की सीमा पर सवाल उठाए, जबकि डॉ. तनुज भाटिया ने हार्ट फेल्योर के दिशा-निर्देशों को जमीनी स्तर पर मरीजों तक पहुंचाने पर जोर दिया। डॉ. संदीप सूरी ने समग्र नियंत्रण के लिए ‘ट्रिपल मैकेनिज्म थेरेपी’ पर चर्चा की।
- मोटापा और आधुनिक चिकित्सा सत्र:
- डॉ. अमन रोहतगी: मोटापे को दीर्घकालिक बीमारी मानते हुए इसे बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से आगे बढ़कर देखने की सलाह दी।
- डॉ. अजय कुमार गुप्ता: शरीर की चर्बी से विभिन्न अंगों को होने वाले नुकसान की खामोश प्रगति से अवगत कराया।
- डॉ. नरेश डांग: मोटापे के इलाज में इंक्रेटिन दवाओं के एकल से दोहरे असर की तरफ बढ़ने की प्रक्रिया को समझाया।
- डॉ. अशोक कुमार झिंगन: अपने व्याख्यान और समापन टिप्पणी में सम्मेलन के सभी निष्कर्षों को एक साथ जोड़ा।
