उत्तराखंडसंपादकीय

Laldhang News…रवासन नदी पर दिखी पितरों के प्रति आस्था, सर्व पितृ अमावस्या पर बुक्सा जनजाति के परिवारों ने किया तर्पण |गीता जोशी की रिपोर्ट

Share this news

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

रिद्वार। पितरों के प्रति श्रद्धा, आस्था और कृतज्ञता का पर्व सर्व पितृ अमावस्या आज मनाई जा रही है। पितृ पक्ष के अंतिम दिन हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र की रवासन नदी पर बुक्सा जनजाति के परिवारों ने पितरों को जल अर्पित कर उनका स्मरण किया। वहीं, शहर के विभिन्न घाटों, नदियों और तालाबों पर भी पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।

हिंदू धर्म में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन उन सभी पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए समर्पित है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारणवश जिनका श्राद्ध नहीं हो पाया। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक तर्पण और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

पितरों के तर्पण के लिए विशेष दिन

सर्व पितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का समापन दिवस माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। अनेक परिवार पवित्र नदियों और जलाशयों के किनारे पहुंचकर विधि-विधान से तर्पण करते हैं। वहीं, कुछ लोग घर पर ही धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितरों का स्मरण और पूजा-अर्चना करते हैं।

जानिए पितरों को जल अर्पित करने की विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित किया जाता है।

  1. जल अर्पण: परंपरा के अनुसार जल में काले तिल मिलाकर पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है। कुश का उपयोग भी कई धार्मिक विधियों में किया जाता है।
  2. दिशा का ध्यान: पितृ तर्पण की पारंपरिक विधि में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व माना जाता है।
  3. मंत्र जाप: तर्पण के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए पारंपरिक मंत्रों का जाप किया जाता है।
  4. दान और भोजन: धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना तथा गाय, कौवे और अन्य जीवों के लिए भोजन निकालना पुण्यकारी माना जाता है।

पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर

धार्मिक मान्यताओं में सर्व पितृ अमावस्या को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष की शांति के लिए भी उपाय किए जाते हैं।

जो लोग पितृ पक्ष के दौरान किसी कारणवश श्राद्ध नहीं कर पाते, वे इस दिन अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण और दान कर सकते हैं। यह पर्व परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने, पूर्वजों के योगदान को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का संदेश देता है।

इस अवसर पर खेम सिंह पूर्व प्रधान, Kshitij Kumar Vinod Kumar Pramod Kumar, योगेंद्र सिंह, मनोज, बिजेंद्र कुमार, तेजस कुमार, जीतेन्द्र कुमार, अजय कुमार खेम सिंह पूर्व प्रधान, Kshitij Kumar Vinod Kumar Pramod Kumar, योगेंद्र सिंह, मनोज, बिजेंद्र कुमार, तेजस कुमार, जीतेन्द्र कुमार, अजय कुमार आदि मौजूद रहे।

ad12

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *