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Uttarakhand: दिसंबर तक लीगेसी वेस्ट निस्तारण का लक्ष्य |Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

देहरादून, सितम्बर। उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय निकायों में तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने नियमों के प्रावधानों और राज्य में चल रही व्यवस्थाओं की जानकारी दी।

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि नए नियमों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के साथ सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुनः उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। अब कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा, चार श्रेणियों में अलग किया जाएगा।

डॉ. धकाते के अनुसार 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत या 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा प्रतिदिन उत्पन्न करने वाले संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर माने जाएंगे। इनके लिए पंजीकरण और कचरे के प्रसंस्करण व रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी तय की गई है।

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उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो रहा है। करीब 500 वाहनों में चार कम्पार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। राज्य में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जबकि लगभग 1,800 मीट्रिक टन का प्रसंस्करण किया जा रहा है। लीगेसी वेस्ट का निस्तारण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

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