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Indian Geniuses…ऋषिकेश में जन्मी व पली बढ़ी वाराणसी की बाल प्रतिभा वसुधा का राष्ट्रीय स्तर पर चयन|Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

-संस्कृत मातृभाषा, अमरकोष, पाणिनीय अष्टाध्यायीव गीता के गहन अध्ययन से पाया जिनीयस सम्मान

तीर्थनगरी ऋषिकेश व देववाणी संस्कृत के लिए एक सुखद एवं उपलब्धिपूर्ण समाचार है। वर्ष 2026 के लिए भारत के 145 करोड़ नागरिकों में से चयनित 50 उत्कृष्ट प्रतिभाओं (Indian Geniuses) की सूची में वसुधा भट्टराई ने अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार एवं शिक्षकों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। तीर्थनगरी ऋषिकेश में जन्मी व पली बढ़ी इस होनहार बालिका ने यह उपलब्धि हासिल कर देशभर में देववाणी संस्कृत की जन्मभूमि (देवभूमि उत्तराखंड) व तीर्थनगरी ऋषिकेश का मान बढ़ाया है।

वसुधा भट्टराई, जिनकी आयु मात्र 10 वर्ष है, वर्तमान में तुलसी विद्या निकेतन नगवां, वाराणसी, उत्तर प्रदेश की कक्षा चतुर्थ की छात्रा हैं। उनका चयन कला एवं संस्कृति (विशेषतः संस्कृत ज्ञान परम्परा) के क्षेत्र में उनकी अद्वितीय प्रतिभा एवं असाधारण स्मरणशक्ति के आधार पर किया गया है।


चयन समिति एवं विषय विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी अल्पायु में इस प्रकार की विलक्षण बौद्धिक क्षमता एवं सांस्कृतिक साधना अत्यन्त प्रेरणास्पद है। उन्होंने वसुधा भट्टराई का राष्ट्रीय स्तर पर किए गए चयन एवं इस उपलब्धि के लिए भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत बताया है।


वसुधा के चयन का यह रहा आधार
इस चयन प्रक्रिया में उनकी प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित रहीं।
1.सम्पूर्ण अमरकोष का कण्ठस्थ ज्ञान।

2.पाणिनीय अष्टाध्यायी के 3,996 सूत्रों का सीधा एवं (तथा कुछ अध्याय उल्टा) दोनों क्रमों में कण्ठस्थ होना।

3.श्रीमद्भगवद्गीता के अनेक अध्यायों का सीधा एवं उल्टा दोनों विधियों में स्मरण।

4.संस्कृत, नेपाली, हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषाओं पर पर्याप्त अधिकार।

5.संस्कृत, हिन्दी एवं अंग्रेजी नेपाली भाषाओं में प्रभावशाली वक्तृत्व-कौशल।

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