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सीएम का आदेश ” लापता “| कहां गया परमोशन व महंगाई भत्ता| जानिये क्या मामला

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस


भले ही सरकार जीरो टोलरेंस की बात करती आ रही हो, लेकिन यह बात पूरी तरह ठीक नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मियांे की पदोन्नति एवं राजकीय चतुर्थ श्रेणी, कर्मी, संविदा, उपनल, पी आर डी, ठेका सफाई कर्मियों के मामले में जीरो टोलरेंस बिल्कुल भी नहीं है। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम के आदेश के बाद भी इन कर्मचारियों का ना तो परमोशन हुआ और ना ही महंगाई भत्ता मिल रहा है। ऐेसे में ये कर्मचारी भारी गुस्से में है। इसका सब्र का बांध कभी भी टूटकर आंदोलन की शक्ल ले सकता है। चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ उत्तराखंड ने उक्त मांग को जल्द पूरी करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।


चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ उत्तराखंड ने चतुर्थ श्रेणी कर्मियो की पदोन्नति एवं राजकीय चतुर्थ श्रेणी, कर्मी, संविदा, उपनल, पी आर डी, ठेका सफाई कर्मियों को मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी आज तक प्रोहत्साहन भत्ता नहीं दिए जाने को लेकर एक ज्ञापन पदोन्नति ओर एक प्रोहत्साहन भत्ते के लिए महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य के कार्यालय में दिया । प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेडा एवं महामंत्री सुनील अधिकारी प्रवक्ता शिवनारायण सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष गुरुप्रसाद गोदियाल ने कहा कि लगभग 6 साल बाद लिपिक संवर्ग की पदोन्नति के बाद 25 प्रतिशत कोटे के अनुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की पदोन्नति कनिष्ठ सहायक पद पर की जाये। जिसमंे महानिदेशालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मी भी शामिल हो। जब तक पदोन्नति न हो तब तक किसी भी अधिसंख्य लिपिक का समायोजन न हो साथ ही अधिसंख्य लिपिकों की भांति टाइप टेस्ट हर जनपद की आई टी आई या फिर महानिदेशालय में हो।

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प्रदेश उपाध्यक्ष नेलसन अरोड़ा, संगठन सचिव विपिन नेगी, सुरेंद्र कश्यप,प्रदेश का समिति सदस्य राजेन्द्र तेश्वर ने कहा कि कर्मचारियों की स्टाफ नर्सेज संवर्ग की भांति मरीजो के संपर्क में रहने पर पोष्टिक आहार भत्ता दिया जाता है वैसे ही चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी दिया जाए और आई पी एच एस मानकों के तहत चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को लेब सहायक, डार्करूम सहायक, ओ टी सहायक के पदों पर पदोन्नति की जाये। इसमें कोई भी वित्तीय भार सरकार और शासन को नहीं पड़ेगा। संगठन ने अनुरोध किया कि जल्द से जल्द मांग पूरी हो क्योंकि पदोन्नति की आस में कई कर्मचारी तो सेवानिवृत्त हो चुके है।

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