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YOGI को उत्तराखंडी बताने से पहले उत्तराखंड उनसे सबक ले तो बेहतर|अजय रावत, वरिष्ठ पत्रकार

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सिटी लाइव टुडे, अजय रावत, वरिष्ठ पत्रकार

आदित्यनाथ योगी राजनीति में नित नए प्रतिमान गढ़ रहे हैं। अपराधमुक्त सुशासन के प्रतिफल से देश के सबसे बड़े व जटिल प्रदेश यूपी में पुनः पदारूढ़ हुए योगी ने परंपरा के अनुरूप नए कार्यकाल के मुख्यमंत्री हेतु नई कार खरीदे जाने के प्रस्ताव को अमान्य कर दिया है,

तथाकथित तौर पर कहा जा रहा है कि उन्होंने इस परंपरा का प्रतीकात्मक अनुपालन हेतु कार में एक नया गमछा खरीदने की बात कही है।
आज उत्तराखंड की आम जनता ही नहीं बल्कि सियासतदां भी आदित्यनाथ को उत्तराखंड का निवासी बताने पर तुले हुए हैं। जबकि बेहतर होता कि यहां के सियासतदां उनसे सीख लेते, यहां भी सरकारी खर्चों में कमी लाने के प्रयास होते। मंत्री व अधिकारियों के लिए बेवज़ह नई लक्ज़री कारें खरीदने जैसे फैसले न होते। योगी आदित्यनाथ के नक्शेकदम पर चलकर ही ज्यादा बेहतर तरीके से उन्हें अपने प्रदेश का लाल पुकारा जा सकता था।

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योगी आदित्यनाथ एक ओर सन्यास धर्म का पालन कर रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ की प्रजा के लिए राजधर्म का पालन।
उत्तराखंड के 21 वर्षों पर नज़र डाली जाए तो निःसंदेह कहा जा सकता है कि यदि योगी उत्तर प्रदेश में न होकर यहां उत्तराखंड में सियासत कर रहे होते तो , या तो यहीं के रंग में रंग गए होते अथवा कहीं नैपथ्य में गुमनाम हो जाते..

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