पौड़ी(सुरक्षित)| कांग्रेस में एक अनार सौ बीमार| भगवा दल में भी कम नहीं रार|साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

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सिटी लाइव टुडे, साभार-वरिष्ठ पत्रकार अजय रावत

शायद पौड़ी विस क्षेत्र का अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होने का यह आखिरी टर्म है, इसी को देखते हुए अनुसूचित वर्ग के छुटभैये से लेकर प्रभावशाली नेता हर हाल में इस मर्तबा विधान सभा जाने की ललक पाले हैं। नतीज़तन वहाँ एक अनार सौ बीमार वाले हालात पैदा हो गए हैं।
वहीं भाजपा में भी द्वंद कम नहीं है, मौजूदा विधायक मुकेश कोली और राजकुमार पोरी के दरमियान जो रार मची है वह सतह पर आ चुकी है। सिटिंग गेटिंग के स्वाभाविक फॉर्मूले के भरोसे मुकेश कोली पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं जबकि राजकुमार पोरी भी जिस अंदाज में क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं वह इस बात की ताक़ीद करता है कि वह स्वयँ को भाजपा का प्रत्याशी घोषित कर चुके हैं।

कांग्रेस के समक्ष भले ही एक दर्जन से अधिक चेहरों में से एक चेहरा ढूंढना टेढ़ी खीर हो लेकिन भाजपा के सामने दोहरी चुनौती खड़ी है। एक जबरदस्त एन्टी इनकैम्बेसी और दूसरी दो अहम दावेदारों को लेकर संगठन में खुली दरार..।
कांग्रेस इसलिए असहज है कि नवल किशोर के साथ इस मर्तबा पूर्व आईएएस एसएल मुयाल भी मजबूती से लाइन में डटे हैं, वहीं विनोद दनौशी लगातार जनता के मध्य सक्रिय होने से संगठन के बड़े हिस्से पर उनका दबदबा देखा जा सकता है। इस फेहरिस्त में जगदीश चन्द्र का नाम भी शामिल है जिसकी पंहुच को हल्के में नहीं लिया जा सकता, वहीं अरुणा कुमार हरीश रावत की ओएसडी रही हैं। पोस्टर वार में तामेश्वर आर्य, ऋतु सिंह, गौरव सागर, केशवानंद जैसे नाम भी समांतर में चल रहे हैं।


भाजपा के समक्ष इस मर्तबा अपना किला बचाये रखना काफ़ी मशक्कत भरा होगा। कोली या पोरी में से किसी एक को टिकट मिलने की दशा में अभी से चल रही संगठन की रार भाजपा को गहरा जख्म दे सकती है। जिन हदों तक इन दोनों दावेदारों को लेकर पार्टी संगठन आपस में बंट चुका है वह भाजपा के लिये शुभ संकेत नहीं है। अनुशासन की दम्भ भरने वाली बीजेपी को कोली और पोरी के नाम पर चल रही इस रार के असर को चुनावों में निष्प्रभावी करना होगा, अन्यथा कांग्रेस से पहले बीजेपी ही यहां बीजेपी को परास्त करने का कारण बनेगी।

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इस सीट पर घनानंद भी बीजेपी के प्रबल दावेदार हैं वहीं पूर्व विधायक बृज मोहन कोटवाल की शिक्षिका पत्नी विजयलक्ष्मी के अरमान भी जाग रहे हैं, खबर है उन्हें भी ऊपर से स्टैंड बाई रहने के संकेत मिल चुके हैं। राकेश गौरशाली व सविता देवी भी टिकट का अरमान रखते हैं।
लब्बोलुआब यह कि यदि भाजपा इस सीट पर एकमुठ एकजुट होकर लड़ने में विफल रहती है तो अनेक अंतर्विरोधों के बावजूद कांग्रेस ही यहां बीस साबित होती।

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