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‘ ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे ‘| कांग्रेसी हुये डा महेंद्र राणा| विकास श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस, विकास श्रीवास्तव


भाजपा की प्रदेश सरकार पर लगातार प्रहार करते आ रहे उत्तराखंड नवनिर्माण अभियान के संयोजक डा महेंद्र राणा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। प्रदेश की राजधानी देहरादून में डा राणा ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। डा राणा के राजनीति में आने के कयास लगातार लगाये जा रहे थे, हालांकि डा राणा सियासी पारी खेलने के सवालों पर अब तक साइलेंट ही रहे थे। लेकिन उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम ही लिया है। उनके कांग्रेसी होने के बाद हरिद्वार की राजनीति में भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।

उत्तराखण्ड के वरिष्ठ समाजसेवी एवं उत्तराखंड नवनिर्माण अभियान के संयोजक डा.महेंद्र राणा गुरुवार को देहरादून में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पार्टी प्रदेश कार्यालय देहरादून में उनके साथ-साथ भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के निवर्तमान बोर्ड सदस्य डा.चंद्रशेखर वर्मा,डा.कमल नयन डंगवाल, डा.अनुराग उनियाल,डा.पारस अग्रवाल ,डा.सद्दाम हुसैन, डा.जहांगीर आलम ,डा.मनु कुमार,दिगम्बर रावत,एडवोकेट नरेंद्र राणा, विनिश उनियाल,शाहिद अंसारी,धीरज राणा,राजीव चैहान, आदि को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। कांग्रेस की गढ़वाल मीडिया प्रभारी गरिमा दसौनि,ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय सदस्य अनिल भास्कर,मनीष करणवाल सहित राज्य के सभी कांग्रेस पदाधिकारियों ने पार्टी में शामिल होने पर डा.राणा एवं उनके साथियों का स्वागत किया ।

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मीडिया से बात करते हुए डा.राणा ने कहा कि उत्तराखण्ड की वर्तमान भाजपा सरकार की कोरी घोषणाओं ,जनभावनाओं के विपरीत लिए गये भू क़ानून , देवस्थानम बोर्ड ,पहाड़ी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण जैसे निर्णयों , लोकायुक्त नियुक्ति एवं प्रदेश के लाखों बेरोज़गार युवाओं के रोज़गार के प्रति उदासीनता से आहत होकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में आकार उत्तराखण्ड के लिए संघर्ष करने का निर्णय लिया है ।
डा.राणा ने अपनी राजनैतिक पारी के लिए कांग्रेस को ही चुनने का कारण बताते हुए कहा कि प्रदेश की समस्याओं का समाधान करने में व्यावहारिक धरातल पर कांग्रेस पार्टी ही सक्षम है ।उत्तराखण्ड कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल जैसे ज़मीन से जुड़े हुए नेता हैं जो उत्तराखण्ड की समस्याओं एवं यहाँ की जल जंगल ज़मीन संस्कृति को जड़ से समझते हैं तथा इनका व्यावहारिक समाधान करने में सक्षम हैं ।

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