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तन को सुकून और मन को शांति देता चैलूसैंण | जयमल चंद्रा की रिपोर्ट

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सिटी लाइव टुडे, जयमल चंद्रा, द्वारीखाल


चैलसैंण, पहाड़ के वाशिदांे के लिये यह नाम नया नहीं है। चैलूसैंण का जिक्र खूब होता है। यह वह जगह है जहां से पर्वतराज हिमालय के भरपूर दर्शन हो जाते हैं। खास बात यह है कि पर्यटन की संभावनाओं से लैस यह जगह पर्यटन विकास की बाट जो रहा है। यदि चैलूसैंण पर पर्यटन विभाग की नजर-ए-इनायत हों तो बात कुछ और ही हो सकती है।

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जनपद पौड़ी के द्वारीखाल ब्लाक के अंतर्गत आता है चैलूसैंण। डबरालस्यूं पट्टी का यह मुख्य बाजार है। यहूं कहें कि करीब पंद्रह गांवों की यह हृदय स्थली है। चैलूसैंण में भरपूर सौंदर्यता है। बेहद रमणीक जगह है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, उद्योग विभाग का क्षेत्रीय कार्यालय भी यहां है। पंजाब नेशनल बैंक, जिला सहकारी बैंक आदि भी यहां मौजूद हैं। अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कालेज भी चैलूसैंण में संचालित हो रहा है।

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चैलूसैंण से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर प्रसिद्ध नागगढ़ी मंदिर भी है। यह मंदिर असीम आस्था व विश्वास का केंद्र है। चैलूसैंण से ऋषिकेश, कोटद्वार, पौड़ी तक आवाजाही भी होती है। कहने का मतलब यह है कि बहुत कुछ है चैलूसैंण मंे। रमणीक इतना कि एक बार जो यहां जायें फिर बार-बार जाने का मन करता है। कमी यह रह गयी है कि चैलूसैंण में पर्यटन विकास की संभावनायें हैं लेकिन इस ओर ना तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और ना ही प्रशासन ने। यदि चैलूसैंण में पर्यटन विकास पर काम किया जाये तो यहां बात ही कुछ और होगी।

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