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डिटॉक्सिफिकेशन से चर्म रोग दूर करें। जानिये क्या है डिटॉक्सिफिकेशन और कैसे करें| प्रस्तुति- डा गोला| आयुर्वेदिक चिकित्सक

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सिटी लाइव टुडे, प्रस्तुति- डा गोला-आयुर्वेदिक चिकित्सक

आसान शब्दों में कहा जाए, तो यह शरीर को उन तत्वों से निजात दिलाता, जो हमें नुकसान पहुंचाते हैं। शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से निजात दिलाने के लिए इलाज की अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं डिटॉक्सिफिकेशन या डिटॉक्स। इनमें भरपूर पानी और जूस पीना, सलाद और पाचक पदार्थ खाने के अलावा उपवास रखना, एनीमा के जरिए पेट की सफाई या मलावरोध दूर करने के उपाय शामिल हैं।’ डिटॉक्स शरीर और दिमाग को स्वस्थ और तरोताजा रखने की प्रक्रिया है। इससे मानसिक तनाव और दूसरे विकार दूर भागते हैं और नई ऊर्जा का संचार होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार थकान, अपच, कब्ज, मोटापा, बार-बार जुकाम और बुखार, तनाव, अक्सर सरदर्द, नींद न आना या जरूरत से ज्यादा सोना, जोड़ों में दर्द, निराशा, अवसाद और सेक्स के प्रति अनिच्छा आदि शरीर में टाक्सिंस बढ़ने के लक्षण हैं। इन हालात में डिटॉक्स जरूरी हो जाता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन के कई तरीके हैं और कोई भी डिटॉक्स प्रोग्राम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूरी है।

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सिटी लाइव टुडे, प्रस्तुति- डा गोला-आयुर्वेदिक चिकित्सक

शरीर को डिटॉक्स करने के कई तरीके
कुछ दिनों की स्पेशल डिटॉक्स डाइट लेना या उपवास के रूप में अनियमित रूप से भूखे रहना डिटॉक्स का कारगर उपाय नहीं है। हेल्दी डाइट और योग सहित नियमित फिजिकल एक्सरसाइज जरूरी है।

  1. खान-पान में सब्जियां, फल और बीज (अलसी, खसखस आदि)
  2. तरल पदार्थो का सेवन करें
  3. चीनी, प्रोसेस्ड और तली हुई चीजें कम खाएं ।
  4. शराब कम पिएं
  5. सिगरेट से दूरी बनाएं

अगर पेट को कुछ आराम मिले तो शरीर की ऊर्जा लौटती है। यही वजह है कि व्रत से डिटॉक्सिफिकेशन की परंपरा रही है। आधुनिक मेडिकल साइंस ने भी इसकी अहमियत को माना है। आम लोग संतुलित आहार के साथ उपवास करें तो बेहतर है। उनके मुताबिक शुरुआत में ही पूरी तरह भूखा रहना जरूरी नहीं है। इसके पांच विकल्प हैं: (1) दिन भर सिर्फ फल, सब्जियां, मेवे और सीड्स खाना, (2) दिन में एक बार भोजन करना जिसमें सिर्फ फल और चावल से बनी चीजें शामिल होंे, (3) दिन भर सब्जियों के सूप या जूस पीना, (4) एक बार खिचड़ी या सलाद का सेवन और (5) दिन की शुरुआत में नाश्ते से पहले 16 घंटे भूखे रहना।

आयुर्वेदिक

आयुर्वेद हमेशा से डिटॉक्स पर जोर देता रहा है। इसलिए आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के कई सेंटर इन दिनों डिटॉक्स पैकेज पेश कर रहे हैं। आयुर्वेदिक डिटॉक्स में डिटॉक्स फुट स्पा और बाथ भी शामिल हैं। पंचकर्म पद्धति भी डिटॉक्स का ही एक रूप है। आयुर्वेदिक डिटॉक्स में विशेष तेलों से मसाज, स्टीम बाथ, औषधीय तेल को सिर पर गिराकर तनाव कम करना, एनीमा से पेट साफ करवाना, नस्यम के अंतर्गत नाक में दवा डालना और औषधि वाले द्रव से गरारे करना शामिल है।

शरीर के अंदर की सफाई यानि पूरी बॉडी की गंदगी या शरीर को डिटाक्सीफाई के संबंध में लोगों को जागरुक करने के लिए हमने आयुर्वेद & फिजियोथेरेपी चिकित्सक डॉ गोला जी से बात की तो उन्होंने बताया कि वर्तमान जीवन शैली के साथ ही जानकारी की कमी हमें लगातार एक ओर जहां हमारी उम्र घटाती जा रही है, वहीं हमारी शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन रही है।
डॉ गोला जी के अनुसार हमारे शरीर में मौजूद खून – शरीर के करोड़ों सेल्स को ऑक्सीजन, मिनरल्स, और अन्य पोषक तत्व पहुंचाने का काम करता है और यही सेल्स हमारे स्वस्थ शरीर का भी निर्माण करते हैं। लेकिन हमारे गलत खानपान से, अधिक अम्लीय पदार्थ और नमक के सेवन से ये धीरे धीरे दूषित होते जाता है।अधिक अम्लीय पदार्थ और नमक खाने, अनुचित खान-पान और कब्ज रहने से रक्त दूषित हो जाता है।
वहीं यदि शरीर से विजातीय पदार्थ जैसे मल मूत्र आदि, अगर सही से ना निकलें तो भी ये गंदगी शरीर के रक्त में घुल जाती हैं। जिस कारण से अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
जिनमें चर्म रोग विशेष हैं। इसलिए स्वस्थ और सुन्दर शरीर की कामना रखने वालों को अपने रक्त की शुद्धि पर विशेष ध्यान देना चाहिए।


इनका करें उपयोग…
जानकारों के अनुसार चीनी के स्थान पर गुड खाना चाहिए। विटामिन ‘सी’, लोहा, कैल्शियम ये सभी रक्तशोधक है। अत: खून को प्राकृतिक तरीके से साफ़ करने के लिए इन आहारों को अपने भोजन में ज़रूर शामिल करना चाहिए।

खून की सफाई और बॉडी डिटॉक्स के आसान घरेलु उपाय

नीम – रक्त दोष दूर : नीम की पाकी हुई दस निम्बोली नित्य चूसने से रक्तविकार ठीक हो जाता है। नीम के पत्ते, फूल, निम्बोली छाल और जड़ सबको छाया में सुखाकर पीस लें। चौथाई चम्मच प्रतिदिन इसकी पानी से फंकी लें। इससे हर प्रकार का रक्त दोष ठीक हो जायेगा। लम्बी आयु तक जीवन स्वस्थ रहेगा।

मुनक्का – किडनी और लिवर शुद्ध: 25 ग्राम मुनक्के रात को पानी में भिगों दें। इन्हे प्रात: पीसकर एक कप पानी में घोलकर प्रतिदिन पीते रहने से रक्त साफ़ होता है। इस प्रयोग से किडनी और लिवर शुद्ध हो जाते है। इसको महीने में 3-4 बार कर सकते है यह बहुत कारगर उपाय है।

ग्वारपाठा (एलोवेरा) – पूरे शरीर के लिए फायदेमंद : ग्वारपाठा रक्तशोधक है। ग्वारपाठे का ताज़ा रस 25 ग्राम शहद 12 ग्राम और आधे नींबू का रस मिलाकर दो बार सुबह शाम पीना चाहिए।

करेला – दूषित रक्त साफ़ : 60 ग्राम करेले का रस एक कप पानी में मिलाकर नित्य कुछ दिन तक सेवन करने से शरीर का दूषित रक्त साफ़ हो जाता है।

आंवला – चर्म रोगों में लाभदायक : आंवला रक्त में बढ़ी हुई गर्मी को कम करता है। रक्त में जमा मल, विष को दूर कर रक्त शुद्ध करता है। मांस में गर्मी बढ़ा कर मांस के मल को जलाता है। पेशी कोषों को शुध्द करता है। आंवला हर प्रकार शरीर की हर चीज़ की सफाई करता है। चर्म रोगों में लाभदायक है। यह विटामिन ‘सी’ का भण्डार है। नया रक्त बनाता है।

कच्चे दूध –चार दिन दूध में शहद डालकर पीएं।

बेल – रक्त साफ़ : बेल का चूर्ण और देशी बूरा सामन मात्रा में मिला कर पानी से फंकी ले। रक्त साफ़ हो जायेगा।

नींबू – पेट और आंतों की सफाई: नींबू रक्त को शुद्ध करता है। नींबू को हल्के गरम पानी में दिन में तीन बार पीना चाहिए। पानी, चाय की तरह गर्म होना चाहिए। या एक नींबू के चार टुकड़े कर लें। चार कप दूध भर लें। एक कप दूध में एक टुकड़ा नींबू का निचोड़ कर तुरंत पी जाएं।

म – रक्त साफ़ : एक कप आमरस, एक चौथाई दूध, एक चम्मच अदरक का रस, मिश्री स्वाद के अनुसार मिला कर नित्य पीना चाहिए। यह रक्तशोधक है। एक कप आमरस में आधा कप दूध, एक चम्मच घी, दो चम्मच अदरक का रस मिलाकर नित्य जब तक आम मिलते रहें, पीते रहें। इससे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तथा रक्त साफ़ होगा।

हल्दी – रक्त साफ़ : आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच पिसा हुआ आंवला मिला कर गर्म पानी से फंकी लेने से रक्त साफ़ होता है।

प्याज – रक्तविकार दूर : प्याज का रस एक चौथाई कप और एक निम्बू का रस या शहद मिला कर दस दिन नित्य पीने से रक्त विकार दूर होकर रक्त शुद्ध होता है। प्याज का ताज़ा रस आधा कप, गाजर का रस एक कप, पालक का रस एक कप ये तीनो मिलाकर नित्य प्रात: भूखे पेट पीने से रक्तविकार दूर होकर रक्त साफ़ हो जाता है।

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टमाटर – चर्म रोग में लाभकारी : लाल टमाटर का रस सुबह शाम एक एक गिलास पीने से रक्त साफ़ होता है। चर्म पर होने वाली छोटी छोटी फुंसियां, खुजली, त्वचा का रूखापन, सूखापन, तथा लाल चकते दूर हो जाते हैं।

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