World Mental Health Day 2026@ “अनुभवों को सुनना ही नहीं, उन्हें बदलाव का माध्यम बनाना जरूरी ” | कन्या गुरूकुल से आयी बुलंद आवाज| Click कर पढ़िये पूरी News

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस
हरिद्वार। कन्या गुरुकुल परिसर के मनोविज्ञान विभाग में भी विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस अत्यंत उत्साह एवं जागरूकता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान मनोविज्ञान विभाग की एवं प्राध्यापकों ने छात्राओं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की इस वर्ष की थीम “जीने के अनुभवों को सुना जाए : वास्तविक आवाज, वास्तविक परिवर्तन” पर आधारित विभिन्न सार्थक गतिविधियों में भाग लिया। इस अवसर पर मानसिक सेहत को लेकर जागरूकता लाने का भी संकल्प भी लिया गया।


“हर किसी की है एक कहानी” – छात्राओं ने साझा किए अनुभव
‘हर किसी की एक कहानी है’ के मूल संदेश के साथ छात्राओं ने अपने बचपन की स्मृतियों, खेल-कूद, पढ़ाई तथा जीवन के विविध खट्टे-मीठे अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा किया। इस संवाद के माध्यम से यह बात सामने आई कि जीवन में उतार-चढ़ाव सभी के आते हैं, किंतु यदि हम अपने अनुभवों को साझा करें तो न केवल सीखने का अवसर मिलता है, बल्कि मन का बोझ भी हल्का होता है।

मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों को व्यक्ति-केंद्रित बनाने का आह्वान
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मानसिक समस्याओं से प्रभावित व्यक्तियों से सार्थक रूप से जुड़ने और उनके अनुभवों को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस वर्ष का अभियान यह आह्वान करता है कि प्रभावित व्यक्तियों की आवाज उन नीतियों और सेवाओं को आकार दे जो उनके जीवन से जुड़ी हैं। जब उनके अनुभवों को सही ढंग से सुना जाएगा और निर्णयों में शामिल किया जाएगा, तब मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियाँ अधिक संवेदनशील, अधिकार-आधारित और व्यक्ति-केंद्रित बन सकेंगी।
मार्गदर्शन एवं विचार:
- डॉ. सुनीता रानी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि, “अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि हम बुरे अनुभवों से सीखें और अच्छे अनुभवों से प्रेरित होकर अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ें। विपरीत परिस्थितियों में उत्पन्न तनाव और आत्मविश्वास की कमी को दूर करने में संचार और सहयोग की मुख्य भूमिका होती है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रहे लोगों की बातें केवल सुनना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में बदलाव का माध्यम बनाना होगा।” कार्यक्रम में छात्राओं को सहानुभूतिपूर्ण श्रवण (Empathic Listening) और मानसिक प्राथमिक चिकित्सा (Mental First Aid) के गुर भी सिखाए गए।
- डॉ. ऋचा सक्सेना ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “मन की बात खुलकर साझा करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना किसी कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा कदम है।”
रंगारंग गतिविधियाँ एवं आभार

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने विभिन्न मनोरंजक एवं जागरूकता गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस सफल आयोजन में डॉ. पारुल मलिक, दीपा साहू एवं शोध छात्रा मनिका गुप्ता की सराहनीय भूमिका रही।
