Uttarakhand News….ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जिलाधिकरी सविन बंसल ने किया औचक निरीक्षण |Click कर पढ़िये पूरी News

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस

ऋषिकेश। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ऋषिकेश का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में भारी अव्यवस्थाएं और गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताते हुए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।

निरीक्षण में पाया गया कि सब-रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में अवैध रूप से लिपिक द्वारा विलेखों का निबंधन किया जा रहा था, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। जिलाधिकारी ने प्रश्न किया कि जब संपत्ति मूल्यांकन (धारा 47-ए) का ज्ञान ही नहीं है तो स्टाम्प शुल्क किस आधार पर तय किया जा रहा है। इस पर उन्होंने जिम्मेदार कार्मिकों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई के संकेत दिए।

औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय दरों पर भूखंडों के छोटे-छोटे टुकड़े कर कई रजिस्ट्रियां किए जाने के मामले भी सामने आए, जिससे करोड़ों रुपये की स्टाम्प चोरी की आशंका जताई गई। इस संबंध में विस्तृत आख्या शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पाया गया कि कई महीनों से लंबित मूल विलेख आवेदकों को वापस नहीं किए गए थे। सैकड़ों मूल अभिलेख अलमारियों में धूल खाते मिले, जबकि नियमानुसार इन्हें तीन दिन के भीतर लौटाया जाना चाहिए। कूटरचित विलेखों और लंबित मूल अभिलेखों के मामलों में जिलाधिकारी ने कंप्यूटर जब्त कर तहसील प्रशासन के सुपुर्द कर दिया।

रजिस्ट्री की नकल 24 घंटे में उपलब्ध कराए जाने के नियम के बावजूद महीनों और वर्षों से लंबित पाई गई, जिससे हजारों आमजन परेशान थे। कार्यालय में एक ‘घोस्ट कार्मिक’ भी पाया गया, जिसका न तो कोई नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति रजिस्टर में नाम दर्ज था। इस पर जिलाधिकारी ने सभी कार्मिकों का विवरण तत्काल तलब किया।

इसके अतिरिक्त, कार्यालय में छह माह से अधिक अवधि के विलेख लंबित मिले। औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित खसरा नंबर और सूची की जानकारी पूछे जाने पर कार्मिक संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। कार्यालय में पुराना डेटाबेस संचालित पाया गया, जिसका भी कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

कार्यालय सुबह 9:30 बजे खुलने के बावजूद पहली रजिस्ट्री 11:15 बजे की गई। रजिस्ट्री शुल्क व अन्य शुल्कों के लिए पृथक व्यवस्था न होकर सभी भुगतान एक ही काउंटर पर लिए जा रहे थे, जिसे प्रक्रियात्मक त्रुटि माना गया।

जिलाधिकारी ने सभी अनियमितताओं को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने, रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने और दोषी कार्मिकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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मौके पर उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहर, तहसीलदार चमन सिंह आदि अधिकारी मौजूद रहे।

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