Panchakarma का पहला कर्म ” वमन “| उल्टी से शरीर का Detox| जानिये वमन के बारे में संपूर्ण जानकारी| साभार-रजनी चौहान

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस-देहरादून


citylivetoday.com सिटी लाइव टुडे मीडिया हाउस की हालिया खबर में हमने बताया कि पंचकर्म क्या है और इसके कितने प्रकार हैं। आपने खबर पढ़ी लेकिन अच्छी लगी लेकिन एक सवाल आपके जहर में तैर रहा होगा जो स्वाभाविक भी है। ऐसा हमें भी महसूस हुआ। सवाल यह कि पंचकर्मा के पांच प्रकार होते हैं । नाम भी बताये गये लेकिन इनका प्रयोग और लाभ का जिक्र नहीं किया। इस खबर में पांच प्रकारों में से एक बमन का विस्तार से जिक्र कर रहे हैं। इसके बाद अन्य चार प्रकारा का भी उल्लेख किया जायेगा। एक बार पिफर हाजिर हैं पंचकर्म की जानकार रजनी चौहान। तो पेश है यह खास रिपोर्ट। Vaman Therapy according Ayurveda

पंचकर्मा का वमन कर्म बारह साल से ज्यादा और 65 साल से कम के लोगों का किया जाता है।ध्यान देने वाली बात यह है कि धार्मिक धर्म, गर्भावास्था और डिप्रेशन से ग्रसित लोगों को भी वमन नहीं किया जाता है। खास बात यह भी है कि वनम कराने से एक दिन पहले जीभर के मीठा खिलाया जाता है।

panchkerma पंचकर्म की जानकारी रजनी चौहान बताती हैं कि वमन कर्म भी शरीर का detoxification शुद्धिकरण करता है। वमन के जरिये उल्टी करवाकर शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है।

रजनी चौहान आगे बताती हैं कि सरल शब्दों में कहें तो शरीर में मौजूद दोषों को मुख के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को वमन कर्म कहा जाता है।


वमन के जरिये कफ दोष ; इसके पश्चात पित दोष एवं सबसे अंत में वात दोष निकाले जाते हैं। मदनफल आदि औषधियों के द्वारा रोगी को उल्टी करायी जाती है।
पंचकर्म की जानकार रजनी ने सिटी लाइव टुडे मीडिया हाउस से बात करते हुये बताया कि
वमन करवाने से पहले रोगी का परीक्षण किया जाता है कि वह रोगी वमन को करने के लिए उपयुक्त है या नहीं।

ये हैं वनन के लाभ

वमन से होता है अमाशय का शोधन
यह कर्म अमाशय में स्थित दोषों का शोधन करता है। अमाशय का शोधन होने से पुरे शरीर का ही शोधन हो जाता है। वमन करने से पहले किया जाने वाला अभ्यंग (बॉडी मसाज) एवं स्वेदन शरीर के दोषों को अमाशय में इक्कठा कर देता है। ये सभी दोष वमन कर्म के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते है द्य इसमें कुपित कफ, टोक्सिन एवं अन्य गन्दगी का शोधन हो जाता है।

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वमन कर्म से ठीक होने वाले रोग
श्वांस
खांसी
जुकाम
एलर्जी
स्किन एलर्जी
कुष्ठ रोग
अमाशय शोधन
अरुचि अर्थात खुल कर भूख न लगना
साइनस
मोटापा
मूत्र विकार
सभी प्रकार के कब्ज विकार
सभी प्रकार के पित्तज विकार

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