” नमस्कार, ये गुरूकुल कांगड़ी है ” यज्ञ से शुरु और वेदों से मंथन: सीमाओं से परे मनोविज्ञान ” पता चली अंदर तक की बात “.बहती रही ज्ञान गंगा| Click कर पढ़िये पूरी News

सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस
नमस्कार, ये गुरूकुल कांगड़ी है मंगलवार का दिन गुरूकुल कांगड़ी विवि में बेहद खास रहा है। यहां मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित सीमाओं से परे मनोविज्ञान विषयक सेमिनार में अनुसंधान, ज्ञान, विज्ञान का गहन मंथन हुआ है। इस सेमिनार में शुरू से लेकर अंतक बस एक ही चाह रही कि बस सुनते ही रहें। आइये आपको इस सेमिनार मेें ही लिये चलते हैं। ज्ञान सरिता ऐसी प्रवाहित हुयी कि हर कोई इसी में गौते लगाता रहा।


दरअसल,….गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय (GKV) के मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में ‘साइकोलॉजी बियॉन्ड बाउंड्रीज़: इंटरडिसिप्लिनरी पाथवेज़ टू ह्यूमन फ्लोरिशिंग एंड वेल-बीइंग’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस भव्य आयोजन की शुरुआत पारंपरिक रूप से यज्ञ के साथ हुई। उद्घाटन सत्र और प्रमुख विचारउ द्घाटन सत्र की अध्यक्षता मुख्य अतिथि प्रो. सत्यदेव निगमालंकार ने की,


जिनका मुख्य विषय ‘आध्यात्मिक मनोविज्ञान’ (Spiritual Psychology) रहा। इस अवसर पर IQAC के निदेशक प्रो. पंकज मदान ने वेल-बीइंग पर, RDC के निदेशक प्रो. सुहास ने कॉन्फ्रेंस के महत्व पर, और मुख्य वक्ता प्रो. नवीन गुप्ता ने सोशल वेल-बीइंग तथा ट्रांसफॉर्मेटिव एक्सपीरियंस पर अपने विचार रखे। इसके अलावा, प्रो. राकेश बेहमानी ने इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रो. अरुण कुमार (कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष) और प्रो. राकेश कुमार
(कॉन्फ्रेंस समन्वयक) की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र के दौरान प्रो. अरुण कुमार और महिमा द्वारा लिखित पुस्तक एजिंग माइंड (Aging Mind) का विमोचन भी किया गया। व्यापक सहभागिता और शोध पत्रकॉन्फ्रेंस में देश भर से भारी संख्या में शोधार्थियों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया:कुल 220 प्रतिभागी इस आयोजन में शामिल हुए। कॉन्फ्रेंस के तहत कुल 14 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 4 ऑफलाइन और 10 ऑनलाइन सत्र शामिल रहे। इन सत्रों में कुल 118 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस राष्ट्रीय आयोजन में देश के 16 राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, कश्मीर, तमिलनाडु, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, पुदुचेरी, हरियाणा,
दिल्ली और ओडिशा) के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यू यॉर्क से भी प्रतिनिधित्व देखने को मिला। तकनीकी सत्र और समापन समारोहविभिन्न तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता पूरे भारत से आए सहायक आचार्यों द्वारा की गई, जिसमें देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के सह-प्राध्यापक डॉ. संतोष कुमार का विशेष योगदान रहा। समापन सत्र (Valedictory Session) की अध्यक्षता वेद विभाग के अध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद शास्त्री ने ‘मन की शुद्धि’ (Mind Purification) विषय पर की। इस दौरान संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. ब्रह्मदेव ने ‘मन पर वैदिक विचार’ और परीक्षा नियंत्रक प्रो. एल.पी. पुरोहित ने ‘बियॉन्ड बाउंड्रीज़’ विषय पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट आयोजन सचिव डॉ. सुनीता रानी ने प्रस्तुत की, जबकि संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. दीपक सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर डा मनोज कुमार चौहान, नवीन पंत, डा विक्रम आदि भी मौजूद रहे।
इनका भी रहा विशेष सहयोग
इस सेमिनार को सफल बनाने में रिसर्च स्कॉलर रचना आर्य, प्रशांत कुमार, सिद्वांत चौधरी, प्रशांत कुमार, गोविंद, श्रृति, रैना, मनिका, आंचल, प्रज्ञा, पीजी डिप्लोमा छात्र मलखीत सिंह, का भी विशेष सहयोग रहा। इसके अलावा Post Graduation के छात्र व यूजी के छात्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
