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क्या कुंभ मेला भत्ता पाने को आंदोलन ही करना होगा| पढ़िये पूरी खबर

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सिटी लाइव टुडे, मीडिया हाउस


संयुक्त कर्मचारी मोर्चा राजकीय, निगम, स्वायतशासी संस्थाओं का एक मात्र संगठन द्वारा बार बार मेलाधिकारी महाकुंभ मेला से अनुरोध किया जा रहा है कि जो राजकीय, निगमों, के कर्मचारियों ने महाकुंभ मेला में कोरोना महामारी और मेले में दोनों जगह कार्य करने के बाद भी आज तक मेला भत्ता नहीं दिया गया है। कर्मचारियों की लिस्ट विभागों से नहीं मांगी जा रही है और सभी विभागों के संविदा कर्मचारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों को भी एक मुश्त मेला भत्ता 2016 पूर्व की भांति दिया जाये को लेकर सचिव शहरी विकास उत्तराखंड शासन और माननीय शहरी विकास को ज्ञापन भेजा गया है कि कर्मचारियों को मेला भत्ता दिए जाने का शासनादेश शीघ्र किया जाये।


संरक्षक सुरेंद्र तेश्वर संयोजक राजेन्द्र श्रमिक, सुनील राजोर, वीर सिंह असवाल, शिवनारायण सिंह ने कहा कि सरकार/शासन से अपील है कि कर्मचारियों को महंगाई के प्रतिकार स्वरूप मिलने वाले मेले भत्ते को शीघ्र दिया जाना चाहिए हर बार मेला भत्ता लेने के लिए आंदोलन करना पड़ता है। 2016 का मेला भत्ता भी एक डेढ़ साल बाद आंदोलन करने के बाद मिला था कर्मचारियों ने मेले के दौरान स्वास्थ्य, निगमो, प्रशासन,ने दोहरी भूमिका निभाई कोरोना में भी कार्य किया और मेला में भी कार्य किया। उसके बाद भी कर्मचारियों को मेला भत्ता न दिया जाना न्यायोचित नहीं है संगठनों को आंदोलन के लिए मजबूर किया जा रहा है इसलिये तत्काल मेला भत्ता दिया जाना चाहिए।

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मुख्य संयोजक दिनेश लखेडा संयोजक सचिव इंदर सिंह रावत निकाय कर्मचारी महासंघ के नेता अखिलेश शर्मा ने कहा कि मेला भत्ता मुख्यालय के कर्मचारियों के साथ साथ पूरे जनपद को मिलना चाहिए क्योंकि पूर्ण जनपद के कर्मचारी मेले के दौरान कार्य करते हैं और उन्होंने मांग की 4200 ग्रेड पे की बाध्यता समाप्त कर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को मेला भत्ता दिया जाए

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मेला भत्ता संविदा कर्मचारियों, आउटसोर्स कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने भी पूर्ण मेले में राजकीय, निगम के कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया है माननीय शहरी विकास मंत्री जी और शहरी विकास सचिव महोदय को पत्र भेजकर जल्द मेला भत्ता दिलाने की मांग की है अन्यथा कि स्थिति में आंदोलन होता है तो उसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व मेला प्रशासन का होगा।

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